हिमाचल में पंचायती राज के चुनाव चल रहे है। आए दिन ग्राम पंचायत के उम्मीदवार तरह तरह से सोशल मीडिया पर अपनी फोटो डाल कर सुर्खियां बटोर रहे हैं। कुछ समर्थक उनको प्रोमोट भी कर रहे है तो कुछ लोग उटपटांग कॉमेंट भी कर रहें हैं। कुछ पंचायते ऐसी हैं कि वे निर्विरोध चुनी गई हैं। पर बहुत सारी पंचायते ऐसी भी है जिनमें बहुत से उम्मीदवार हैं। हिमाचल के इन चुनावों मे एक सुखद बात देखने को यह मिली कि काफी युवा पढ़े लिखे उम्मीदवार सामने आ रहे हैं, पर किसी ने अपना पांच वर्ष का एजेंडा व विजिन नही बताया।

अब प्रदेश वासियों को देखना अब यह भी है कि चुने जाने वाले प्रधान व उप प्रधान नया क्या करते हैं। क्या कोई पंचायत प्रधान ने यह घोषणा की:
1. कि पंचायत में एक पुस्तकालय बनाया जाएगा।
2 कि पंचायत में एक मैदान बनाया जाएगा ।
3 कि पंचायत में पार्क बनाया जाएगा।
4 कि पंचायत में हर वर्ष पुलिस आर्मी आदि की भर्ती के लिए गांव में एक स्पेशल फ्री ट्रेनिंग करवाएगा ।
5 कि स्वच्छता को प्रार्थमिकता दी जाएगी।
6 कि पंचायत की हर गली पक्की होगी।

आज जितने भी उम्मीदवार हैं कल यही बदल जाएंगे। आज यह आपके घर के चक्कर काट रहे हैं, कल आप इनके घर के चक्कर मरेंगे। क्या किसी ने यह कहा कि आप मेरे पास नही आओगे, मैं आपके पास आऊंगा, आपके काम के लिए। बहुत से लुभावने तथ्य आएंगे। पर मुझे नही लगता कि कुछ इस तरह से होगा। यदि हर पंचायत को दिए जाने वाले पैसे का 50%भी लगवा दिया जाए तो तो भी काफी तरक्की हो जाती है, पर वास्विकता क्या है यह सभी को पता है। सभी कहते कुछ और है और करते कुछ और हैं। पंचायत देश की नींव रखती है और लोगों के पैसे का सही से प्रयोग करे। काफी है सही से लोगो को सरकारी योजनाओं के बारे में अवगत करवा दी काफी हो जाता है पर यह भी नही हो पाता।

हैरानी की बात है कि 1500 लोगों की पंचायत में भी नितीविरोध चुनाव होना संभव नही हो पाता। कैसी विविधता में एकता है। जब एक गांव के लोग एकजुटता नही दिखा सकते। कैसे कहे कि एकता है, हर कोई प्रधान पद की आड़ में रोजगार तलाश रहा है। दूसरी तरफ यह देखा जाए कि कितनी आय महीने में सरकार द्वारा निर्धारित है। यह भी कोई ज्यादा नही, पर फिर भी इतने उम्मीदवार होना एक चिंता का विषय जरूर है व साथ ही सरकार या पार्टीयों के नुमाइंदों का इनमें भागीदारी करना भी एक प्रश्नवाचक चिन्ह है। कहीं पंचायत आय का साधन उनकी सहमति से है। युवाओं का राजनीति में आना सुखद होगा पर जब वे बड़े स्तर पर आएंगे न प्रधान पद के लिए।

इन पंचायती चुनावी यज्ञ में बुद्धिजीवी कहां चले जाते हैं। क्यों 1500 की पंचायत 5 से 10 उम्मीदवार हो जाते हैं। एक तरफ इस बार ओर नई बात हुई है कि क्यों इन चुनावों में इतना आरक्षण दिया गया। क्या यह एक राजनितिक षड्यंत्र है। अजीब है पर सोचने बाली बात है कि इतना आरक्षण आखिर क्यों दिया गया। जो काफी चिंताजनक है आज के समय मे आरक्षण का विरोध आम है पर इस आरक्षण पर क्यों लोगो का विरोध नही हुआ?

By RIGHT NEWS INDIA

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