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वित्तीय चेतावनी: एक्सपर्ट्स ने चांदी में 60% गिरावट की आशंका जताई, जानिए क्या हैं इसके ठोस कारण

Business News: पिछले वर्ष चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई थी। यह सफेद धातु प्रति किलो 2.54 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन अब बाजार विशेषज्ञ भारी गिरावट की चेतावनी दे रहे हैं। वर्तमान में चांदी की कीमत घरेलू बाजार में 2.35 लाख रुपये प्रति किलो है।

विशेषज्ञों ने जताई बड़ी गिरावट की आशंका

वर्ष 2025 में चांदी की कीमत में लगभग 180 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। यह तेजी बढ़ती मांग और आपूर्ति में कमी के कारण आई थी। अब विश्लेषक इसकी कीमत में 60 प्रतिशत तक की गिरावट की संभावना जता रहे हैं। उनके पास इस आशंका के पीछे ठोस तर्क हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की वर्तमान कीमत खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। इस उच्च स्तर से औद्योगिक मांग खतरे में पड़ सकती है। जब किसी उद्योग की लागत एक निश्चित सीमा से अधिक बढ़ जाती है तो वह विकल्प तलाशने लगता है।

चांदी की तेजी के प्रमुख कारण

चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी के पीछे कई कारण रहे। सैमसंग ने लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी में बदलाव की घोषणा की। इससे औद्योगिक मांग बढ़ी और कीमतों में वृद्धि हुई। संरचनात्मक बदलावों ने भी तेजी में योगदान दिया।

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अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव से पेरू और चाड से निर्यात आपूर्ति प्रभावित हुई। एक जनवरी 2026 से चीन द्वारा चांदी के निर्यात पर अप्रत्यक्ष प्रतिबंध ने भी कीमत बढ़ाने का काम किया। ये सभी कारक मिलकर चांदी को रिकॉर्ड स्तर पर ले गए।

औद्योगिक क्षेत्र में विकल्पों की तलाश

फोटोवोल्टिक सेल और सोलर पैनल निर्माता पहले ही चांदी से हटकर तांबे की ओर बढ़ चुके हैं। बैटरी उद्योग में भी चांदी से कॉपर बाइंडिंग तकनीक की ओर रुख किया जा रहा है। यह बदलाव लागत कम करने के प्रयासों का हिस्सा है।

चांदी की उच्च कीमत ने उद्योगों को सस्ते विकल्पों की खोज के लिए प्रेरित किया है। तकनीकी विकास ने भी वैकल्पिक सामग्रियों के उपयोग को संभव बनाया है। इस प्रवृत्ति के जारी रहने की संभावना है।

ऐतिहासिक पैटर्न दोहराएगा इतिहास?

चांदी के ऐतिहासिक रुझानों पर नजर डालें तो मजबूत तेजी के बाद भारी गिरावट आई है। वर्ष 1980 में हंट ब्रदर्स ने विश्व के चांदी भंडार का एक तिहाई हिस्सा जमा कर लिया था। इससे एक्सचेंजों को मार्जिन राशि बढ़ानी पड़ी।

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सीडीएक्स ने पहले ही मार्जिन राशि 25 प्रतिशत बढ़ा दी है। इससे तरलता की कमी के कारण शॉर्ट-कवरिंग शुरू हो सकती है। वर्ष 2011 में भी चांदी की कीमत 48 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 75 प्रतिशत नीचे आ गई थी। विशेषज्ञों को लगता है कि यह इतिहास फिर दोहराया जा सकता है।

वित्तीय वर्ष 2027 तक आ सकती है गिरावट

विश्लेषकों का मानना है कि चांदी की कीमत मंदी की चपेट में रह सकती है। वित्तीय वर्ष 2027 के अंत तक इसमें 60 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। यह गिरावट धीरे-धीरे आएगी और कई चरणों में पूरी होगी।

निवेशकों को इस संभावित गिरावट के प्रति सतर्क रहना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव का यह चक्र नियमित रूप से देखने को मिलता है। उच्च स्तरों पर निवेश करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। बाजार विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि निवेशक सतर्क रहें।

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