New Delhi News: कोलकाता में I-PAC दफ्तर पर ईडी की रेड का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट में जोरदार बहस देखने को मिली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। ईडी ने दावा किया कि सीएम ने रेड के दौरान फाइलें ‘चोरी’ कीं और सबूत मिटाए। वहीं, बंगाल सरकार की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने पलटवार किया। उन्होंने पूछा कि चुनाव से ठीक पहले ईडी को I-PAC की याद क्यों आई?
‘मुख्यमंत्री ने खुद डाली बाधा’
सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि यह घटना हैरान करने वाली है।
- ईडी के अधिकारी I-PAC चीफ प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर जांच कर रहे थे।
- तभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं।
- एसजी ने कहा कि सीएम ने जांच में रुकावट डाली और फाइलें जब्त कर लीं।
- मेहता ने इसे सीधे तौर पर ‘चोरी’ करार दिया।
- आरोप है कि एक ईडी अधिकारी का फोन भी ले लिया गया।
‘पुलिस ने मिटाए सबूत’
एसजी मेहता ने कोर्ट में कहा कि राज्य की पुलिस ने भी कानून का पालन नहीं किया। पुलिस अधिकारियों ने राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह काम किया। आरोप है कि पुलिस मुख्यमंत्री के साथ सबूतों को नष्ट करने आई थी। मेहता ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल गिर जाएगा। उन्होंने मांग की कि वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड किया जाना चाहिए। साथ ही मुख्य सचिव को भी इस मामले में पक्षकार बनाने की बात कही गई।
कोर्ट को बना दिया ‘जंतर-मंतर’
बहस के दौरान हाई कोर्ट में हुए हंगामे का भी जिक्र हुआ। एसजी ने कहा कि हाई कोर्ट के माहौल को खराब किया गया।
- भीड़ जुटाने के लिए मैसेज भेजे गए थे।
- अदालत को ‘जंतर-मंतर’ में बदल दिया गया।
- वकीलों ने इकट्ठा होकर हंगामा किया।
इस पर जस्टिस मिश्रा ने भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कोर्ट में हंगामा नहीं होना चाहिए। एसजी ने दावा किया कि उनके पास व्हाट्सएप चैट के सबूत भी मौजूद हैं।
सिब्बल का सवाल- चुनाव से पहले रेड क्यों?
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि I-PAC बंगाल में चुनाव का काम देख रही है।
- सिब्बल ने पूछा, ईडी को चुनाव के बीच में वहां जाने की क्या जरूरत थी?
- प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनाव से जुड़ी अहम जानकारी थी।
- अगर डेटा ईडी के पास चला गया, तो पार्टी चुनाव कैसे लड़ेगी?
- सिब्बल ने फाइल चोरी के आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि पंचनामा गवाह है कि कोई बाधा नहीं पहुंचाई गई।
हाई कोर्ट में होनी चाहिए सुनवाई
सिब्बल ने दलील दी कि इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की बजाय हाई कोर्ट में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला अनुच्छेद 226 के तहत आता है। वहीं, ईडी ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और ‘भीड़तंत्र’ को हावी नहीं होने दिया जा सकता। फिलहाल कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का बड़ा अखाड़ा बन गया है।
