किसान संघर्ष समिति प्रदेश सरकार द्वारा बागवानी विभाग के माध्यम से बागवानों को उपदान पर दी जा रही विभिन्न लागत वस्तुओं जिनमें मुख्यतः फफूंदीनाशक, कीटनाशक, खाद व पोषक तत्व व अन्य लागत वस्तुओं की आपूर्ति को बंद करने के निर्णय की कढ़ी निंदा करती है तथा प्रदेश सरकार से मांग करती हैं कि सरकार इस बागवान विरोधी निर्णय को तुरन्त वापिस ले तथा बागवानी विभाग के प्रदेश के सभी ब्लॉकों में सब्सिडी पर बागवानों को बेहतर गुणवत्ता की सभी आवश्यक लागत वस्तुओं जिनमें मुख्यतः फफूंदीनाशक, कीटनाशक, खाद व अन्य पोषक तत्व आदि शामिल हैं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर बागवानों को राहत प्रदान करे। समिति का मानना है कि सरकार इस प्रकार के बागवान विरोधी निर्णय निजी कंपनियों के दबाव में आकर इन निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए ले रही है।

सरकार के कृषि व बागवानी के क्षेत्र में दी जा रही सब्सिडी समाप्त करने के इन किसान व बागवान विरोधी निर्णयों के कारण बागवानों को खुले बाज़ार से इन निजी कंपनियों से मनमाने दाम पर लागत वस्तुएं जिनमें मुख्यतः खाद, फफूंदनाशक, कीटनाशक, पोषक तत्व व अन्य लागत वस्तुएं लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। आज बाज़ार पर इन निजी कंपनियों का दबदबा व मनमानी कायम है और सरकार इस मनमानी को रोकने में न केवल पूर्णतः विफल रही है बल्कि इसको बढ़ावा देने में भी इन निजी कंपनियों का सहयोग कर रही है। अधिकांश छोटा, सीमांत व मध्यम किसान इन महंगी लागत वस्तुओं को बाज़ार से नहीं खरीद पाता है जिसके कारण प्रदेश में कृषि व बागवानी के क्षेत्र में उत्पादन व उत्पादकता में निरंतर कमी आ रही है और किसानों व बागवानों का संकट बढ़ रहा है। इससे बागवानी क्षेत्र जिसका प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है भी बुरा असर पड़ेगा।
सरकार इन निजी कंपनियों के दबाव में किस प्रकार से कार्य करती है इसका ज्वलंत उदाहरण दो दिन पूर्व गुजरात की एक कंपनी द्वारा बिना टेस्टिंग व आवश्यक लाइसेंस के बिना ही खाद के नाम पर अपने उत्पादों को हिमफेड के माध्यम से बेचने के लिए माननीय मुख्यमंत्री से लांच करवा दिए गए। यह लांच कंपनी के द्वारा बिल्कुल गैर कानूनी रूप से करवाया गया है क्योंकि जब तक किसी भी कृषि व बागवानी के लागत वस्तु का मान्यता प्राप्त विश्विद्यालय या विभाग द्वारा उसका उचित ट्रायल व वह उसके प्रयोग की अनुमति नहीं दे देते तब तक यह उत्पाद न तो बाज़ार में कंपनी बेच सकती है और न ही इसे किसी भी सरकारी या गैर सरकारी एजेंसी या संस्था के माध्यम से इस्तेमाल के लिए किसी को भी बेचा व दिया नहीं जा सकता है। इसके साथ ही कंपनी व ऐजेंसी या संस्था को प्राधिकृत विभाग से इसको बेचने का लाइसेंस लेना आवश्यक है। परन्तु न जाने किसके दबाव में बिना किसी कानूनी औपचारिकताओं को पूरे किये ही माननीय मुख्यमंत्री को गुमराह कर इनसे इन उत्पादों को लॉन्च करवाया गया। किसान संघर्ष समिति इसकी जांच की मांग करती है तथा इसके लिए जो भी दोषी है उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की मांग करती है तथा सरकार इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर इसकी समस्त गतिविधियों पर रोक लगाए। यदि सरकार तुरंत इस पर कार्यवाही नहीं करती है तो इससे किसानों व बागवानों को करोड़ों रुपये की क्षति होगी और इन अनाधिकृत लागत उत्पादों के इस्तेमाल से प्रदेश में कृषि व बागवानी की करोड़ों रुपए की आर्थिकी को भी नुकसान होगा। इससे पहले भी किसानों को अनाधिकृत रूप से नकली व घटिया खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक, पोषक तत्व, ग्रोथ रेगुलेटर आदि बेचने की शिकायतें किसानों व बागवानों ने की है और कई मामले भी सामने आए हैं। कुछ वर्ष पूर्व इसी प्रकार से सरकार की एक संस्था द्वारा बिना टेस्टिंग के सुपरफॉस्फेट खाद की आपूर्ति करने का मामला सामने आया था जिस पर सरकार ने कार्यवाही कर इस खाद की बिक्री पर रोक लगा दी थी।
किसान संघर्ष समिति सरकार से मांग करती है कि प्रदेश में कृषि व बागवानी क्षेत्र में चल रहे संकट को देखते हुए तथा किसानों व बागवानों को बाज़ार में निजी कंपनियों के द्वारा की जा रही लूट को रोकने के लिए सरकार किसानों व बागवानों को लागत व अन्य वस्तुओं पर सब्सिडी प्रदान कर ब्लॉक के स्तर पर कृषि व बागवानी विभाग के माध्यम से पहले की भांति ही मांग के अनुरूप उपलब्ध करवाई जाए। यदि सरकार इन मांगों पर गौर नहीं करती तो समिति किसानों व बागवानों को संगठित कर आंदोलन करेगी।

By RIGHT NEWS INDIA

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