ट्रांसमिशन लाइनों से प्रभावित किसानों द्वारा कृषि अध्यादेश के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन करने हेतु चल रहे क्रमिक धरना सातवें दिन में प्रवेश कर गया।

श्री नैना देवी जी विधानसभा के जुखाला में पिछले 7 दिनों से राष्ट्रीय किसान आंदोलन के समर्थन हेतु तथा केंद्र सरकार की जन विरोधी और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ, ट्रांसमिशन लाइनों के प्रभावित व विस्थापित किसान इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 को भी देशहित व किसान हित में खारिज करने की मांग वर्षों से कर रहे हैं। क्योंकि यह एक्ट अंग्रेजों के जमाने में अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया था। नैना देवी विधानसभा से होकर लगभग 7 से अधिक ट्रांसमिशन लाइने गुजरती है, इन लाइनों के मालिकों को मुनाफा दिलाने के लिए लाखों लोगों को राजनीतिक षड्यंत्र के चलते भूमिहीन किया गया है।

भारतीय किसान यूनियन के हिमाचल संयोजक व टावर लाइन शोषित जागरूकता मंच के संस्थापक सदस्य व राष्ट्रीय संयोजक अधिवक्ता रजनीश शर्मा ने कहा कि चंद उद्योग पतियों को राजनीतिक रूप से फायदा पहुंचाने के लिए अंग्रेजों के जमाने में आम जनता की मिलकियत जमीन, घरों,दुकानों व मवेशी खानों के ऊपर से जबरदस्ती बिना भूमि अधिग्रहण के बिजली की लाइनों को बिछाने के लिए जो कानून बनाया था। वह आज 21 वीं सदी में भी जारी है। जबकि धरती पुत्र और किसान पुत्र के नाम से चुनावों में वोट लेने वाले नेता अपने ही किसानों के समर्थन में ट्रांसमिशन लाइन बिछाने हेतु लोकसभा स्तर तथा विधानसभा स्तर पर उचित कानून बनाने में असफल रहे है।

उन्होंने कहा कि कि केंद्र सरकार कृषि अध्यादेश में भी संशोधन कर जानबूझकर के किसानों के संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने जा रही है। जिस प्रकार इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 आपके अनुसार हिमाचल प्रदेश व पूरे हिंदुस्तान में जबरदस्ती बिना लोगों को भरोसे में लिए व लोगों की सहमति से उनकी जमीनों, घरों मवेशी खानों तथा मलकीत जमीन के ऊपर से बिना अधिग्रहण मुनाफा कमाने वाले चंद उद्योगपतियों के हित में ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण किया जाता है। जिसमें किसानों को न्यायिक प्रक्रिया में जाने से अंग्रेजी हुकूमत की तरफदार सरकारों द्वारा जनविरोधी को किसान विरोधी कानून बनाए जाते हैं।

रजनीश शर्मा ने कहा की यह तीनों कृषि अध्यादेश किसान, मजदूर व वकील विरोधी है। सभी प्रगतिशील व जागरूक लोगों को किसानों के समर्थन में देशहित में आगे आना चाहिए।

मंच के जिला प्रधान बाबू राम ठाकुर ने कहा केंद्र सरकार कृषि अध्यादेश के खिलाफ आंदोलनरत किसानों महिलाओं बुजुर्गों बच्चों के प्रति बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं है, और ना ही राजनीतिक विचारधारा में गतिरोध के चलते इस संवेदनशील विषय को शीघ्र अति शीघ्र खत्म करने की मंशा में है। जो सरकार की लापरवाही व निष्क्रियता को जगजाहिर कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह मानना बिल्कुल गलत है कि बड़े-बड़े किसानों की आवाज को दबाया हुआ कुचला जा सकता है तथा ज्यादा दिनों तक अगर किसान ऐसे ही बैठे रहेंगे कड़ाके की ठंड से तंग आकर घर वापस चले जाएंगे।

आज धरने पर निक्कू राम, अनिल महाजन, देशराज महाजन, कृष्ण लाल, निकडू राम, आदि बैठे जिनका अन्य किसानों बाबू राम हरि सिंह ठाकुर रूपलाल, रंजीत सिंह, सुखदेव, जगदीश, प्रकाश ठाकुर, सुनीता देवी, मोनू ठाकुर भी मौजूद रहे।

By RIGHT NEWS INDIA

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