दो साल से नही मिले प्रधानमंत्री आवास योजना के पैसे, टूटे घर में रहने को परिवार मजबूर

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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान की मंजूरी के बाद भी भांबला पंचायत का एक परिवार टूटे हुए घर में रहने को मजबूर है। दो साल पहले गिरा था मकान, इसमें तिरपाल लगाकर रह रहा है यह परिवार। भद्रोल गांव के बूढ़ी सिंह अपने तीन बच्चों पत्नी और बूढ़ी मां के साथ रह रहे हैं। भाम्बला पंचायत ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बूढ़ी सिंह के लिए आवास स्वीकृत किया, लेकिन राशि उपलब्ध नहीं कराई।

अब इस तरह घर कैसे बनाया जा सकता है? बुद्धि सिंह अपने घर की मरम्मत कराने में भी सक्षम नहीं है। टूटे घर में रहने को मजबूर बुद्धि सिंह ने कहा कि उनमें घर बनाने की हिम्मत नहीं है।

पंचायत का कहना है कि सरकार ने घर के लिए पैसों की मंजूरी दे दी है। अब तक उसे न तो पैसे मिले और न ही घर बन पाया। उनका सरकार और प्रशासन से भी विश्वास उठ गया है।

उन्होंने खेद व्यक्त किया कि सरकार और प्रशासन को इस बात की जानकारी नही है कि उनका घर क्षतिग्रस्त हो गया है। इसमें रहना खतरे से खाली नहीं है। गोपालपुर प्रखंड विकास अधिकारी तिवेंद्र चानौरिया ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराकर पंचायत प्रतिनिधियों से रिपोर्ट भी ली जाएगी। इसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

भांबला पंचायत की प्रधान सुनीता ने कहा कि दो साल बाद भी सरकार और प्रशासन से पैसा नहीं मिला है, फिर प्रभावित परिवार की मदद कैसे की जा सकती है। बुद्धि सिंह का मकान कब से ढह रहा है लेकिन आज तक इसे बनाने के लिए कोई राशि नहीं मिली है। उन्होंने सरकार से घर के लिए राशि तुरंत देने की मांग उठाई है।

मामले की जांच कराई जाएगी। उसके बाद नियमानुसार हर संभव मदद की जाएगी। -अरिंदम चौधरी, डीसी मंडी

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