डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) ने गुरुवार को गोरखपुर के गोलघर से एक तस्कर को गिरफ्तार कर पाकिस्तान में छपे 2000 के 48 नोट बरामद किए थे। डीआरआई अधिकारियों ने युवक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी कर उसे न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। डीआरआई के अधिकारियों ने गोरखपुर और आस-पास के जिलों में सक्रिय उसके मददगारों की तलाश शुरू कर दी है।

डीआरआई के अधिकारियों को सूचना मिली थी कि एक गिरोह के लोग पाकिस्तान में छपे जाली नोट लेकर नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश कर रहे हैं। गिरोह के सदस्य जाली नोटों को यहां के छोटे-छोटे बाजारों में खपाने की कोशिश में हैं।

इस सूचना को संज्ञान लेकर डीआरआई के अधिकारी गिरोह के सदस्यों की तलाश में थे। गुरुवार को डीआरआई अधिकारियों को सूचना मिली कि गिरोह का एक सदस्य गोलघर में मौजूद है। डीआरआई अधिकारियों ने घेराबंदी कर युवक को गिरफ्तार कर लिया। उसकी जलाशी ली गई तो उसके पास से 2000 के 48 जाली नोट मिले।

डीआरआई अधिकारियों ने पूछताछ की तो मालूम हुआ कि युवक का नाम मुनव्वर है और बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के देवरिया थाना क्षेत्र के आजमगढ़ गांव का निवासी है। उसके पास से बरामद जाली नोट पाकिस्तान में छपे हैं। सूत्रों का कहना है कि डीआरआई ने युवक से पूछताछ की है। डीआरआई को उससे कई महत्वूपर्ण सूचनाएं भी मिली हैं। डीआरआई अधिकारियों ने शुक्रवार को कानूनी कार्रवाई पूरी कर उसे जेल भेज दिया।

सूत्रों का कहना है कि डीआरआई ने जाली नोट के साथ गिरफ्तार किए गए युवक से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान युवक ने जो कुछ बया किया है उससे आशंका पैदा हो गई है कि उसके कुछ मददगारों भी हो सकते हैं। डीआरआई ने उसके मददगारों की तलाश शुरू कर दी है।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के देवरिया थाना क्षेत्र के आजमगढ़ निवासी मुनव्वर हुसैन ने डीआरआई अधिकारियों को जो कुछ बताया वह इस तरह है। नेपाल के वीरगंज से 2000 रुपये के 48 नकली नोट उठाए थे। बिहार के रक्सौल सीमा से उसने भारत में प्रवेश किया था। 96 हजार रुपये के नोट की इस खेप को उसे दिल्ली में एक व्यक्ति को देना था। डीआरआई की टीम को सूचना मिली थी जिसके बाद टीम अलर्ट थी। सूत्रों के मुताबिक मुनव्वर नोट लेकर अपने घर गया फिर वहां से बस से दिल्ली के लिए निकला था। बिहार से गोरखपुर तक बस से आया। यहां से दूसरी बस पकड़ने वाला था कि डीआरआई की टीम ने उसे दबोच लिया। पूछताछ के लिए टीम उसे वाराणसी स्थित कार्यालय पर ले गई। पूछताछ में उसने बताया कि इससे पहले भी वह एक बार नकली नोट की खेप दिल्ली पहुंचा चुका है। एक ट्रिप में 15 हजार रुपये उसे कमीशन के तौर पर मिलता था। फिलहाल उसके कितने साथी हैं और कितनी नोट दिल्ली पहुंचा चुका है यह अभी जानकारी नहीं हो पाई है। डीआरआई ने 153 कस्टम एक्ट, 489 बी और यूपीए के तहत केस दर्ज कर उसे वाराणसी में कोर्ट में पेश किया जहां से जेल भेज दिया गया।

आरबीआई की गाइड लाइन के तहत नकली नोट में 26 तरह के फीचर होते हैं। पाकिस्तान में छापे गए ये नोट हाई क्वालिटी के थे। इनमें 20 से ज्यादा फीचर असली नोट से मिल रहे थे। यही वजह थी कि जालसाज इसे आसानी से चलाने में कामयाब हो जाते। डीआरआई की टीम ने जब नोट की जांच की तो पता चला कि कुछ ही फीचर इसमें से मिसिंग हैं।अधिकारियों ने बताया कि नोट को नासिक भेजा जाएगा वहां जांच होगी।

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