Delhi News: देश में जहां रसोई गैस की भारी किल्लत से हाहाकार मचा है, वहीं बवाना के दरियापुर गांव के एक किसान मिसाल पेश कर रहे हैं। प्रगतिशील किसान सत्यवान सहरावत को न तो एलपीजी सिलेंडर की चिंता है और न ही महंगे ईंधन की। उन्होंने अपने खेत में एक बायोगैस प्लांट लगाया है, जिससे वह हर रोज करीब दो किलो गैस पैदा कर रहे हैं। इस प्लांट से न केवल उनके घर की रसोई चलती है, बल्कि 20 पशुओं का चारा और दर्जनों मजदूरों का खाना भी इसी ईंधन पर तैयार होता है।
65 हजार का निवेश और 8 साल से मिल रही मुफ्त गैस
सत्यवान ने करीब आठ साल पहले 65 हजार रुपये खर्च कर यह गोबर गैस प्लांट लगवाया था। 40 गज जमीन पर बना यह प्लांट 10 घन मीटर की क्षमता रखता है। तब से लेकर आज तक यह प्लांट लगातार चल रहा है। इस बायोगैस से प्रतिदिन घर के काम के अलावा पशुओं के लिए 30 से 40 किलोग्राम दलिया पकता है। साथ ही, खेत पर काम करने वाले 25-30 श्रमिकों का भोजन भी इसी गैस से बनाया जाता है। सत्यवान का यह कदम ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने का बेहतरीन उदाहरण है।
गैस के साथ मिलती है ‘जादुई’ प्राकृतिक खाद
गोबर गैस प्लांट का दोहरा फायदा यह है कि इससे गैस के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाली प्राकृतिक खाद (सलरी) भी मिलती है। सत्यवान हर रोज करीब 200 किलोग्राम गोबर प्लांट में डालते हैं और उतनी ही मात्रा में खाद प्राप्त करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान गोबर से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकल जाती हैं। इसके बाद जो खाद बचती है, वह फसल के लिए अमृत समान है। इस खाद के इस्तेमाल से खेतों में खरपतवार भी बहुत कम पनपती है।
सरकार से सब्सिडी और प्रोत्साहन की मांग
सत्यवान बताते हैं कि आठ साल पहले उनके साथ कई ग्रामीणों ने यह प्लांट लगवाया था। हालांकि, उचित रखरखाव और जानकारी के अभाव में बाकी लोगों के प्लांट बंद हो गए। सत्यवान का मानना है कि बायोगैस प्लांट ग्रामीण भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को बायो गैस प्लांट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी सब्सिडी देनी चाहिए। इससे न केवल पर्यावरण बचेगा, बल्कि रसोई गैस के मौजूदा संकट से भी स्थाई निजात मिल सकेगी।


