रविवार, जनवरी 4, 2026
3.3 C
London

चांदी की बेतहाशा रैली पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता, 60% तक गिरावट की आशंका, निवेशकों को दी यह सलाह

Business News: चांदी की ऐतिहासिक तेजी पर अब ब्रेक लग सकता है। बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। उनका मानना है कि आने वाले समय में चांदी के दामों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने 82.670 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। पर सप्ताह की शुरुआत में ही यह कीमत लुढ़ककर 71.300 डॉलर पर आ गई। यह अचानक गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

क्यों पहुंचे थे दाम रिकॉर्ड स्तर पर?

पिछलेएक वर्ष में चांदी ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस दौरान इसकी कीमतों में करीब 180 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इस तेजी के पीछे कई बड़े कारण थे। सैमसंग ने सॉलिड-स्टेट बैटरी की ओर बढ़ने की घोषणा की।

इससे चांदी की औद्योगिक मांग में अचानक उछाल आया। पेरू और चाड जैसे देशों से आपूर्ति में बाधा ने भी कीमतों को बढ़ाया। चीन द्वारा चांदी के निर्यात पर परोक्ष रोक ने भी बाजार को गर्म किया।

औद्योगिक मांग में आ सकती है कमी

पेस 360 केचीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल के अनुसार स्थिति बदल रही है। कोई भी उद्योग कच्चे माल का इस्तेमाल तभी तक करता है जब तक वह आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो। चांदी की लागत बढ़ने से कंपनियां विकल्प तलाश रही हैं।

यह भी पढ़ें:  आरबीआई रेपो रेट: दिसंबर में घट सकती है ब्याज दर, लोन की ईएमआई होगी कम; जानें आप पर क्या पड़ेगा प्रभाव

सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियों ने चांदी की जगह तांबे का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। बैटरी क्षेत्र में भी इसी तरह के प्रयास जारी हैं। इसराइल और चीन की कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं।

इतिहास खुद को दोहरा सकता है

बाजार विशेषज्ञ पिछलेरुझानों का हवाला दे रहे हैं। या वेल्थ के निदेशक अनुज गुप्ता ने बताया कि 1980 में चांदी की कीमत में भारी गिरावट आई थी। उस समय यह 49.5 डॉलर से गिरकर 11 डॉलर पर पहुंच गई थी।

2011 में भी ऐसा ही हुआ था। चांदी 48 डॉलर से गिरकर करीब 75 प्रतिशत नीचे आ गई थी। विशेषज्ञों को लगता है कि अब फिर वैसी ही स्थिति बन सकती है। इसलिए खुदरा निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।

कहां तक जा सकती है कीमत?

विशेषज्ञोंके अनुमान के अनुसार दो परिदृश्य संभव हैं। चांदी फरवरी 2026 तक 100 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच सकती है। पर यह तेजी अल्पकालिक होगी। इसके बाद भारी दबाव देखने को मिल सकता है।

यह भी पढ़ें:  Income Tax Refund: आपका ITR रिफंड लेट क्यों है? ये हैं 4 मुख्य वजहें

दूसरा परिदृश्य यह है कि 82.670 डॉलर का स्तर ही शीर्ष साबित हो। ऐसे में वित्त वर्ष 2027 के अंत तक कीमतें 35 से 40 डॉलर तक गिर सकती हैं। इसका मतलब मौजूदा स्तर से भारी गिरावट होगी।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

विशेषज्ञ निवेशकोंको मुनाफा वसूलने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि इस समय नई खरीदारी से बचना चाहिए। बाजार की चाल को समझना और सतर्क रहना जरूरी है।

निवेशकों को बाजार में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। अगर कीमतें गिरती हैं तो यह एक लंबी अवधि की गिरावट हो सकती है। इसलिए जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना आवश्यक है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। कमोडिटी बाजार में मार्जिन आवश्यकताओं में बदलाव से दबाव पैदा हो रहा है। निवेशक भावनाओं में बदलाव से बाजार प्रभावित हो रहा है।

चांदी का भविष्य अब औद्योगिक मांग और तकनीकी प्रगति पर निर्भर करेगा। वैकल्पिक धातुओं की बढ़ती स्वीकार्यता एक बड़ा कारक होगी। निवेशकों को इन सभी पहलुओं पर गौर करना चाहिए।

Hot this week

हिमाचल: पुलिस थाने में धमाके से हड़कंप, आतंकी साजिश का शक! NIA करेगी जांच?

Himachal News: नालागढ़ पुलिस थाने में हुए रहस्यमय विस्फोट...

Related News

Popular Categories