मंडी संसदीय उपचुनावों के लिए ईवीएम तैयार, अब केवल चुनवों की घोषणा होने का इंतजार

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मंडी संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव के लिए चुनाव विभाग ने इलेक्ट्रानिक वोटिग मशीन (ईवीएम) तैयार कर ली है। अब उपचुनाव की तिथि घोषित होने का इंतजार है। मंगलवार को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में माक पोल हुआ। इसके बाद ईवीएम स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रख दी गई। उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के बाद ईवीएम सभी हलकों को भेजी जाएंगी। करीब दो सप्ताह से ईवीएम की प्रारंभिक स्तर की जांच (एफएलसी) चल रही थी। सोमवार शाम तक सभी ईवीएम की एफएलसी का काम पूरा कर लिया गया।

उपचुनाव के लिए हरियाणा के जींद, करनाल व कुरुक्षेत्र से 3600 ईवीएम मंगवाई गई हैं। इस बार उपचुनाव में एम-3 ईवीएम का इस्तेमाल होगा।

नए वर्जन की एम-3 ईवीएम में कुल 384 उम्मीदवारों की जानकारी दर्ज की जा सकती है। इसमें 24 बैलेटिंग यूनिट जोड़ सकते हैं। एम-3 ईवीएम में सेल्फ डायग्नोस्टिक फीचर हैं यानी मशीन खुद जांच कर सकती है कि उसके सारे फीचर सही से काम कर रहे हैं या नहीं। अगर कोई दिक्कत होगी तो कंट्रोल यूनिट की स्क्रीन पर तकनीकी खामी डिस्प्ले हो जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर

मंडी, कुल्लू, शिमला व चंबा जिला प्रशासन को ईवीएम की खेप नौ अप्रैल को मिल गई थी। 15 अप्रैल से एफएलसी का कार्यक्रम तय था, मगर कोरोना की दूसरी लहर के पांव पसारने पर स्थगित करना पड़ा था। दूसरी लहर शांत पड़ने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों को ईवीएम की एफएलसी का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए थे। एफएलसी 15 जून से शुरू हुई थी। करीब 14 दिन में एफएलसी का काम पूरी तरह से निपटा लिया गया है। सबसे अधिक 1870 ईवीएम मंडी व 1058 कुल्लू जिले को मिली हैं। सांसद रामस्वरूप शर्मा के निधन से यह सीट खाली हुई है। इस सीट पर अगस्त सितंबर में उपचुनाव संभावित है।

ईवीएम की एमएलसी पूरी हो गई है। मंगलवार को माक पोल करवाया गया। ईवीएम स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रख दी गई हैं।

-विजय कुमार, तहसीलदार चुनाव मंडी।

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