यह बात अनुसूचित जाति /जनजाति सरकारी कर्मचारी कल्याण संघ के जिलाध्यक्ष दर्शन लाल कालिया ने बैठक के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मानवीय आधार पर न्यायसंगत मामलों पर एक दूसरे की पैरवी की जानी चाहिए। इससे सामाजिक समरसता और भाईचारे की भावना को बल मिलता है। किसी भी वर्ग के साथ होने वाले भेदभाव और अन्याय के लिए एकमुश्त सभी वर्गों को साथ आने की जरूरत है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी वर्ग विशेष के साथ होने वाली घटनाओं पर संबंधित वर्ग के चुनिंदा लोग बोलते हैं। ऐसी स्थिति में सभी वर्गों की सामूहिक भागीदारी नहीं हो पाती है। जिसके चलते समाज में जातिगत भेदभाव और तनाव की समस्याएं बरकरार रहती हैं।

उन्होंने कहा कि संघ हमेशा हर वर्ग को न्याय प्रदान किए जाने के पक्ष में है। हमें वर्ग विशेष के कल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों की गलत व्याख्या करने से बचना चाहिए। ताकि समाज मे भ्रम की स्थिति पैदा न हो। हालांकि हर वर्ग के बुद्धिजीवी संवैधानिक आरक्षण की व्यवस्था को समझते हैं। इसके बावजूद कुछ लोग बार-बार जातिगत आरक्षण को पीट पीटकर गलत रूप देने के प्रयास में रहते है। जबकि हमें स्वीकार करना चाहिए कि संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की 75% आबादी के लिए 49.5% प्रतिनिधित्व निश्चित किया गया है। इसके साथ 25% सामान्य आबादी को सीधे रूप से 50.5% आरक्षण का लाभ मिल रहा है। उन्होंने जातिगत भावना से ऊपर उठकर आपसी सहयोग को मजबूत किए जाने का आह्वान किया।

इस बैठक में उपाध्यक्ष भीम सिंह यादव, राजेश नंदा, नरेश कुमारन राजेश कुमार, जय सिंह ,जालम सिंह यादव, पवन महलवाल, दिनेश कुमार,चांद चौहान, भीम सिंह चौहान समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।

By RIGHT NEWS INDIA

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