मार्केट क्रैश में भी नहीं डूबेगा पैसा! राकेश झुनझुनवाला का वो ‘सीक्रेट मंत्र’ जिससे वे कमाते थे अरबों

India News: शेयर बाजार में जब कोहराम मचता है, तो बड़े-बड़े निवेशक घबरा जाते हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बाजार में मंदी का साया है। ऐसे में निवेशक डरे हुए हैं कि उनकी पूंजी डूब न जाए। लेकिन भारत के ‘वॉरेन बफे’ कहे जाने वाले राकेश झुनझुनवाला के पास एक जादुई फॉर्मूला था। दिग्गज निवेशक रमेश दमानी ने अब उस गुप्त मंत्र का खुलासा किया है। झुनझुनवाला बाजार की बड़ी गिरावट में भी खुद को शांत रखते थे। वे किसी गणितीय फॉर्मूले के बजाय एक खास नजरिए पर भरोसा करते थे।

झुनझुनवाला का अटूट विश्वास और आशावाद

मनीकंट्रोल ग्लोबल वेल्थ समिट में रमेश दमानी ने झुनझुनवाला की सफलता का राज बताया। उन्होंने कहा कि झुनझुनवाला कठिन समय में भी भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर आशावादी रहते थे। जब बाजार गिरता था और चारों तरफ डर होता था, तब वे एक ही बात कहते थे। झुनझुनवाला का मानना था कि “भारत की विकास यात्रा पर भरोसा रखो।” उनके अनुसार बाजार के उतार-चढ़ाव अस्थायी हैं। भारत की प्रगति एक स्थायी सच है। इसी सोच ने उन्हें दशकों तक मुनाफा कमा कर दिया।

क्या है ‘पेड़ कभी आसमान तक नहीं बढ़ते’ का मतलब?

रमेश दमानी ने निवेश के मनोविज्ञान पर गहरी बात कही। उन्होंने समझाया कि ‘पेड़ कभी आसमान तक नहीं बढ़ते।’ इसका सीधा मतलब है कि बाजार हमेशा केवल ऊपर नहीं जा सकता। गिरावट बाजार का स्वाभाविक हिस्सा है। असली संपत्ति रातों-रात नहीं बनती। वह कंपाउंडिंग के जादू से धीरे-धीरे तैयार होती है। निवेश का असली मकसद समय के साथ पूंजी को कई गुना बढ़ाना होना चाहिए। जल्दबाजी में फैसले लेने वाले निवेशक अक्सर नुकसान उठाते हैं।

मार्केट की वोलैटिलिटी को दोस्त बनाना सीखें

दमानी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 1987 के स्टॉक मार्केट क्रैश के समय वे केवल 28 साल के थे। उस दौरान डॉव जोन्स एक ही दिन में 20% गिर गया था। उन्होंने कहा कि पैसा खोने का दर्द हर निवेशक को होता है। चाहे बाजार 10% गिरे या 60%, दर्द बराबर ही रहता है। लेकिन सफल वही होता है जो बाजार के उतार-चढ़ाव को अपना दुश्मन नहीं मानता। उसे निवेश प्रक्रिया का एक जरूरी हिस्सा समझकर टिके रहने वाला ही विजेता बनता है।

तेल की कीमतें और बाजार का भविष्य

मौजूदा हालात में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर काफी चर्चा हो रही है। दमानी ने माना कि तेल की कीमतें चिंता का विषय जरूर हैं। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल तेल की वजह से बाजार की लंबी दौड़ खत्म नहीं होगी। निवेशकों को छोटी अवधि की नकारात्मक खबरों से दूर रहना चाहिए। झुनझुनवाला की तरह लंबी अवधि के विजन के साथ निवेश करना ही समझदारी है।

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