Uttarakhand News: 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धराली गांव में बादल फटने से बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचाई। खीर गंगा नदी के उफान से घर, होटल और दुकानें नष्ट हुईं। 5 लोगों की मौत हुई। 50 से ज्यादा लोग लापता हैं। सेना, NDRF, SDRF और ITBP रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। सीएम धामी ने स्थिति का जायजा लिया। पीएम मोदी ने मदद का भरोसा दिया।
बादल फटने से तबाही
5 अगस्त को दोपहर 1:40 बजे खीर गंगा नदी के ऊपरी हिस्से में बादल फटा। धराली गांव में बाढ़ और भूस्खलन हुआ। सुक्खी टॉप में भी बादल फटा, लेकिन वहां हताहत नहीं हुआ। धराली में 20-25 होटल और दुकानें मलबे में दब गईं। मकान और बाजार नष्ट हो गए। स्थानीय लोग दहशत में हैं। हर दूध मेले की भीड़ से लापता लोगों की संख्या बढ़ी।
रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थिति
सेना की इबेक्स ब्रिगेड ने 10 मिनट में रेस्क्यू शुरू किया। 150 जवानों ने 70 लोगों को बचाया। NDRF की तीन टीमें और ITBP की पांच टीमें तैनात हैं। ड्रोन और खोजी कुत्तों का उपयोग हो रहा है। चिनूक और MI-17 हेलिकॉप्टर तैनात हैं। खराब मौसम ने उड़ानें बाधित कीं। मातली में अस्थायी हेलीपैड बनाया गया। 190 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए।
लापता लोगों की तलाश
50 से ज्यादा लोग लापता हैं। इनमें 1 JCO और 8 जवान शामिल हैं। सेना ने 3 मौतों की पुष्टि की। आकाश पनवार का शव बरामद हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले की भीड़ से संख्या बढ़ी। 28 केरल पर्यटकों का पता नहीं चला। उनके परिजनों ने संपर्क खोने की बात कही। रेस्क्यू टीमें कठिन इलाकों में तलाश कर रही हैं।
पर्यटकों की स्थिति
गंगोत्री में 180-200 पर्यटक फंसे थे। सेना और ITBP ने भोजन और मेडिकल सहायता दी। नेलॉन्ग हेलीपैड से पर्यटकों को निकाला गया। 274 लोग हर्षिल पहुंचे। इनमें गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के यात्री हैं। 135 लोगों को उत्तरकाशी और देहरादून भेजा गया। घायलों को AIIMS ऋषिकेश और जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। 270 बेड्स रिजर्व हैं।
सड़कों और ढांचे का नुकसान
गंगोत्री नेशनल हाइवे भटवारी में 30 मीटर धंस गया। लिंचीगाड और गंगरानी में सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। BRO और मजदूर सड़कें खोल रहे हैं। धराली का सिविल हेलीपैड बंद हो गया। हर्षिल और नेलॉन्ग हेलीपैड चालू हैं। ऋषिकेश-उत्तरकाशी हाइवे पर मलबा रेस्क्यू में बाधा बना। IMD ने 10 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी दी।
पर्यावरणीय चिंताएं
धराली की तबाही ने पर्यावरणीय कमजोरियों को उजागर किया। विशेषज्ञों ने अनियंत्रित निर्माण और जंगल कटाई को जिम्मेदार ठहराया। ग्लेशियल लीक आउटबर्स्ट फ्लड की आशंका जताई गई। भूवैज्ञानिकों ने AI-आधारित चेतावनी सिस्टम की जरूरत बताई। पहाड़ संतृप्त हो चुके हैं। उत्तराखंड में बार-बार बादल फटने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। सरकार से बेहतर योजना की मांग हो रही है।

