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हिमाचल विश्वविद्यालय में वेतन देरी पर भड़के कर्मचारी और प्राध्यापक, 48 घंटे में वेतन देने की रखी मांग

Himachal News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और प्राध्यापकों ने वेतन देरी के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने 48 घंटे में वेतन देने की मांग की। ह्पुटवा ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। यह समस्या कई महीनों से चल रही है। कर्मचारी आर्थिक और मानसिक तनाव में हैं। प्रो. नितिन व्यास ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए। विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान हो रहा है।

कर्मचारियों का प्रदर्शन

हिमाचल विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने वेतन देरी पर नाराजगी जताई। ह्पुटवा के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि 7 अगस्त तक वेतन नहीं मिला। कर्मचारी और उनके परिवार परेशान हैं। यह समस्या कई महीनों से बनी है। प्रदर्शन में प्राध्यापक और कर्मचारी शामिल थे। उन्होंने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया। आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।

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विश्वविद्यालय का इतिहास और छवि

हिमाचल विश्वविद्यालय 1970 में स्थापित हुआ। यह उत्तर भारत में शिक्षा के लिए प्रसिद्ध है। प्रो. व्यास ने कहा कि 55 साल में पहली बार ऐसी देरी हुई। प्रशासनिक लापरवाही से छवि खराब हो रही है। विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा दांव पर है। कर्मचारियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। वेतन देरी से कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है। यह स्थिति चिंताजनक है।

आंदोलन की चेतावनी

ह्पुटवा ने कड़े कदम उठाने की बात कही। यदि 48 घंटे में वेतन नहीं मिला तो आंदोलन होगा। विश्वविद्यालय बंद किया जा सकता है। प्रशासनिक कार्यों का बहिष्कार होगा। परीक्षाएं और मूल्यांकन रुक सकता है। कर्मचारी राज्यपाल और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे। प्रो. व्यास ने कहा कि कर्मचारियों का धैर्य टूट चुका है। यह कदम प्रशासन पर दबाव बनाएंगे।

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प्रशासन को पहले भी चेतावनी

ह्पुटवा सचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने कहा कि कई बार प्रशासन को सूचित किया गया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। वेतन देरी से आर्थिक संकट बढ़ा है। कर्मचारियों ने बार-बार मांग उठाई। प्रशासन की उदासीनता से नाराजगी बढ़ी। डॉ. भारद्वाज ने त्वरित समाधान की मांग की। कर्मचारियों का विश्वास टूट रहा है।

कर्मचारियों का तनाव

वेतन देरी से कर्मचारी तनाव में हैं। परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। कई कर्मचारी कर्ज लेने को मजबूर हैं। मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। प्रो. व्यास ने कहा कि यह स्थिति असहनीय है। कर्मचारियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। कर्मचारियों की मांग जायज है।

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