Himachal News: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से भ्रष्टाचार की एक बड़ी ताजा खबर सामने आई है। यहाँ सनवाल पंचायत में लाखों रुपये का गबन पकड़ा गया है। प्रशासन ने कड़ा एक्शन लेते हुए प्रधान, उपप्रधान और 6 वार्ड सदस्यों को सस्पेंड कर दिया है। यह पूरी कार्रवाई मनरेगा के फंड में हुई हेराफेरी को लेकर की गई है। डीसी मुकेश रेप्सवाल ने तत्काल प्रभाव से निलंबन के आदेश जारी किए हैं।
पौधारोपण के नाम पर 64 लाख का खेल
प्रशासनिक जांच में इस ताजा खबर की पूरी सच्चाई सामने आई है। एसडीएम चुराह की रिपोर्ट में सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई है। मनरेगा के तहत पौधारोपण के लिए आई 64,03,560 रुपये की भारी राशि को नियमों के खिलाफ खर्च किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सिद्ध पाए गए हैं। इस बड़े घोटाले ने विकास खंड तीसा की पूरी पंचायत को हिलाकर रख दिया है।
सबूत मिटाने के डर से हुई कार्रवाई
डीसी चंबा ने अपने आदेश में सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि अगर ये पदाधिकारी अपने पदों पर बने रहते तो जांच प्रभावित हो सकती थी। सबूतों को नष्ट करने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की पूरी आशंका थी। इसी खतरे को देखते हुए प्रधान मोहन लाल और उनकी पूरी टीम को हटा दिया गया है। प्रशासन इस ताजा खबर को गंभीरता से ले रहा है ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
जेल की हवा खा चुका है प्रधान
प्रधान मोहन लाल का रिकॉर्ड पहले से ही खराब रहा है। उसे इस मामले में 23 जुलाई 2025 को गिरफ्तार भी किया गया था। वह 14 दिनों से ज्यादा समय तक न्यायिक हिरासत में रहा था। प्रशासन ने उसे नोटिस देकर जवाब मांगा था। उसने जवाब के लिए 15 दिन का समय भी लिया। इसके बावजूद 7 जनवरी 2026 तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
रिकॉर्ड जमा करने के सख्त निर्देश
डीसी ने प्रधान और उपप्रधान को तुरंत अपना चार्ज छोड़ने को कहा है। उन्हें पंचायत की मोहर, संपत्ति और सभी दस्तावेज पंचायत सचिव को सौंपने होंगे। 8 जनवरी को दिया गया उनका जवाब तथ्यों से मेल नहीं खा रहा था। यह कार्रवाई जिले की बाकी पंचायतों के लिए भी एक कड़ा संदेश है। लोग इस ताजा खबर की चर्चा कर रहे हैं।

