Washington News: दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने अमेरिका को डरा देने वाली चेतावनी दी है। मस्क ने साफ कहा है कि अगर चुनावी सिस्टम नहीं सुधरा, तो अमेरिका खत्म हो जाएगा। उन्होंने भारत की तर्ज पर सख्त नियम लागू करने की वकालत की है। मस्क का मानना है कि अमेरिकी चुनावों में सिर्फ वहां के नागरिकों को ही वोट देने का हक होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने ‘सेव एक्ट’ का समर्थन किया है।
सुरक्षित चुनाव पर मस्क का बड़ा बयान
टेस्ला के सीईओ ने यह बात रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट की एक पोस्ट के जवाब में कही। सीनेटर स्कॉट ने सोशल मीडिया पर मतदान नियमों को सख्त बनाने की बात कही थी। मस्क ने लिखा कि सुरक्षित चुनावों के बिना अमेरिका जीवित नहीं रह सकता। स्कॉट और उनके साथी ‘सेव एक्ट’ अभियान चला रहे हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी चुनावों में केवल अमेरिकी नागरिक ही वोट डाल सकें।
क्या है ‘सेव एक्ट’ और भारत कनेक्शन?
SAVE (सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी) एक्ट एक प्रस्तावित अमेरिकी कानून है। यह काफी हद तक भारत की सख्त चुनाव प्रक्रिया (SIR) जैसा है। इसके तहत वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। समर्थकों का कहना है कि इससे चुनावों में धांधली रुकेगी और निष्पक्षता आएगी। वहीं, आलोचकों का मानना है कि इससे कुछ सही मतदाताओं के नाम भी लिस्ट से कट सकते हैं।
आखिर क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत?
साल 2020 के चुनावों के बाद अमेरिकी वोटिंग सिस्टम पर कई सवाल उठे थे। उस समय चुनावों में रूसी दखल के आरोप भी लगे थे। आज भी अमेरिकी सांसद चुनाव सुरक्षा को लेकर बंटे हुए हैं। कई राज्यों ने अपने स्तर पर वोटर आईडी और रजिस्ट्रेशन के नियम सख्त किए हैं। अब ‘सेव एक्ट’ के जरिए इन नियमों को पूरे अमेरिका में एक साथ लागू करने की कोशिश की जा रही है।
संसद में कहां तक पहुंची बात?
अमेरिकी सरकार ने सेव एक्ट को सदन में पेश कर दिया है। फिलहाल कांग्रेस में इस पर चर्चा चल रही है। इसे कानून बनने के लिए दोनों सदनों (चैंबर) से मंजूरी मिलना जरूरी है। यह बिल भारत की तरह ही सिर्फ देश के मूल नागरिकों को वोटिंग का अधिकार देने की वकालत करता है। इसका सीधा मकसद घुसपैठियों और बाहरी लोगों को मतदान प्रक्रिया से दूर रखना है।
