औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में विद्युत सब स्टेशन न बनाने पर बिजली बोर्ड भारी खामियाजा भुगत रहा है। पावर ग्रिड कारपोरेशन और बिजली बोर्ड के बीच करार के मुताबिक प्रति माह बिजली बोर्ड को प्रोजेक्ट बनाने में हो रही लेटलतीफी की एवज में करीब पांच करोड़ रुपये जुर्माना देना पड़ रहा है। लगभग 30 करोड़ रुपये का 220 केवी सब स्टेशन नहीं लगाने पर बोर्ड पिछले आठ वर्षों से अब तक यह जुर्माना भर रहा है। अब तक करीब 240 करोड़ रुपये का जुर्माना पावर ग्रिड कॉपरेशन को दिया जा चुका है।
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वर्ष 2013 में कालाअंब के उद्योगों को बिजली आपूर्ति करने के लिए दो सब स्टेशन मंजूर हुए थे। 400 केवी के सब स्टेशन का जिम्मा पावर ग्रिड कारपोरेशन और 220 केवी के सब स्टेशन का जिम्मा बिजली बोर्ड को मिला था। दोनों पक्षों में समझौता हुआ कि जो प्रोजेक्ट निर्माण में देरी करेगा, वह प्रतिमाह लगभग पांच करोड़ का जुर्माना भरेगा।

पावर ग्रिड कारपोरेशन ने मीरपुर कोटला में सब स्टेशन तैयार कर दिया, लेकिन बिजली बोर्ड नहीं बना पाया। प्रोजेक्ट के लिए चयनित जमीन को लेकर चल रहे विवाद के कारण काम शुरू नहीं हुआ। अब सरकार नई जगह तलाश कर रही है। हाल ही में इसके लिए गठित उच्च स्तरीय कमेटी भी यहां पहुंची। कालाअंब में लगे करीब 400 उद्योगों में बिजली संकट है। बार-बार कट से उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

बिजली बोर्ड के अधीक्षण अभियंता मनदीप सिंह ने बताया कि जमीन देखने के लिए हाल ही में उच्च स्तरीय कमेटी यहां पहुंची थी। उन्होंने पुरानी साइट के अलावा नई साइट भी देखी है। जल्द फैसला हो सकता है। अब यह कार्य हिमाचल ट्रांसमिशन लाइन को दिया गया है। हालांकि, समझौते के अनुसार जुर्माना बिजली बोर्ड ही भर रहा है। 

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