Election News: चुनाव आयोग ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। ये चुनाव मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए करो या मरो वाले हैं। असम, केरल और पुडुचेरी में कांग्रेस सीधी टक्कर में है। इन तीनों राज्यों में 9 अप्रैल को मतदान होगा। केरल में जीत कांग्रेस के लिए जीवनदान बन सकती है। वहीं, हार से पार्टी का बचा-खुचा मनोबल भी पूरी तरह टूट जाएगा। असम में कांग्रेस चमत्कार की उम्मीद कर रही है। तमिलनाडु में पार्टी पूरी तरह एमके स्टालिन के भरोसे है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस सिर्फ भगवान के भरोसे मैदान में है।
केरल में दांव पर कांग्रेस की साख
केरल में कांग्रेस के सामने खुद को साबित करने का बड़ा मौका है। यहां पिछले दस साल से सीपीआई (एम) की सरकार है। दस साल की सत्ता विरोधी लहर का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। हाल के निकाय चुनावों में भी यूडीएफ ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश काफी हाई है। हालांकि, जमीनी हकीकत बताती है कि यह मुकाबला बिल्कुल भी आसान नहीं है।
दिग्गज नेताओं की अग्निपरीक्षा
कांग्रेस को केरल में एक बड़ा डर सता रहा है। उसे आशंका है कि कहीं भाजपा अपने वोट सीपीआई (एम) को ट्रांसफर न कर दे। पार्टी के भीतर बड़े नेताओं की गुटबाजी भी एक बड़ी समस्या है। इसे देखते हुए कांग्रेस ने किसी भी सांसद को विधानसभा चुनाव नहीं लड़ाने का फैसला किया है। प्रियंका गांधी खुद केरल के वायनाड से सांसद हैं। इस चुनाव में प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल की राजनीतिक समझ की कड़ी परीक्षा होगी।
पुराने चेहरों पर फिर से भरोसा
केरल में नामांकन की आखिरी तारीख 23 मार्च है। कांग्रेस जल्द ही अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करेगी। केंद्रीय चुनाव समिति ने 31 सीटों पर नाम तय कर लिए हैं। पार्टी पिछली बार जीती हुई 22 में से 20 सीटों पर अपने विधायकों को ही टिकट देगी। राज्य की 140 सीटों में से कांग्रेस 95 सीटों पर लड़ेगी। बाकी 45 सीटें सहयोगी दलों के खाते में जाएंगी।
असम में गौरव गोगोई के कंधों पर जिम्मेदारी
असम में कांग्रेस पिछले दस साल से सत्ता से बाहर है। मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी की स्थिति मजबूत है। ऊपरी असम में पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की विरासत के सहारे है। पार्टी ने सांसद गौरव गोगोई को प्रदेश की कमान सौंपी है। वे जोरहाट से विधानसभा चुनाव भी लड़ेंगे। असम में कांग्रेस ने 65 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। 15 सीटें सहयोगियों को दी गई हैं। बाकी 46 सीटों पर जल्द फैसला होगा।
हिमंता बिस्वा सरमा की चुनौती
बोडोलैंड इलाके की 15 सीटों पर कांग्रेस का कोई सहयोगी नहीं है। यह पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है। कई वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई के काम करने के तरीके से नाराज हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा भी चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को घेर रही है। लेकिन, हिमंता की लोकप्रियता के आगे कांग्रेस की रणनीति कमजोर पड़ रही है।
पुडुचेरी और तमिलनाडु का सियासी समीकरण
पुडुचेरी में कांग्रेस बड़े भाई की भूमिका में है। यहां उसका गठबंधन डीएमके के साथ है। राज्य में अभी एनआर कांग्रेस सत्ता में है। 30 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के पास अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर है। तमिलनाडु में कांग्रेस की नैया पूरी तरह डीएमके के भरोसे है। कांग्रेस को गठबंधन में 28 सीटें मिली हैं। अगर स्टालिन सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर बंटी, तो गठबंधन बड़ी जीत दर्ज कर सकता है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।
बंगाल में खोने के लिए कुछ नहीं
पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला है। यहां कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है। पार्टी ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। मालदा और मुर्शिदाबाद के मुस्लिम बहुल इलाके कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य हैं। पिछले चुनाव में वामदलों के साथ लड़ने के बावजूद कांग्रेस का खाता नहीं खुला था। हालांकि, लोकसभा चुनाव में पार्टी ने मालदा दक्षिण सीट जीती थी। बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। सभी 5 राज्यों के नतीजे 4 मई को आएंगे। 4 मई को ही तय होगा कि कांग्रेस वापसी करेगी या फिर एक बार और पुराने बहाने बनाएगी।


