New Delhi: देश में चुनाव आयोग (Election Commission) की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने वोटर लिस्ट अपडेट करने के तरीके पर भारी नाराजगी जताई है। मामला पहचान सत्यापन (Identity Verification) से जुड़ा है। 82 साल के पूर्व नेवी चीफ को सत्यापन के लिए उनके घर से 18 किलोमीटर दूर बुलाया गया है। इस घटना ने वरिष्ठ नागरिकों को होने वाली परेशानी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
सोशल मीडिया पर निकाला गुस्सा
एडमिरल अरुण प्रकाश 1971 युद्ध के वीरता पुरस्कार विजेता हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना दर्द साझा किया है। चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत उन्हें एक नोटिस मिला था। इसमें उन्हें और उनकी 78 वर्षीय पत्नी को सत्यापन के लिए केंद्र पर बुलाया गया। हैरानी की बात यह है कि इतनी उम्र में दोनों पति-पत्नी को अलग-अलग तारीखों पर 18 किलोमीटर दूर जाने का निर्देश दिया गया है।
BLO घर आए थे, तब क्यों नहीं पूछा?
पूर्व नेवी चीफ ने साफ किया कि उन्हें चुनाव आयोग से किसी विशेष वीआईपी सुविधा की दरकार नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने एसआईआर फॉर्म भरे थे। गोवा की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2026 में उनका नाम भी शामिल हो गया था। एडमिरल ने सवाल उठाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तीन बार उनके घर आए थे। अधिकारी उस समय भी अतिरिक्त जानकारी ले सकते थे। अगर फॉर्म में जानकारी पूरी नहीं थी, तो सिस्टम में सुधार की जरूरत है।
बुजुर्गों के लिए संवेदनहीनता पर सवाल
एडमिरल प्रकाश ने कहा कि वह नियमों का सम्मान करते हैं और चुनाव आयोग के नोटिस का पालन करेंगे। लेकिन उन्होंने इस प्रक्रिया की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 20 साल पहले रिटायर होने के बाद उन्होंने कभी विशेषाधिकार नहीं मांगा। लेकिन इतनी उम्र में बुजुर्गों को वेरिफिकेशन के लिए इतनी दूर बुलाना सिस्टम की खामी को दर्शाता है। उनका यह सवाल अब सोशल मीडिया पर एक नई बहस का विषय बन गया है।

