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लक्षदीप बीजेपी के आठ नेताओं ने दिया इस्तीफा, प्रधानमंत्री को लिखे शिकायत पत्र का भी नही मिला जबाब


लक्षद्वीप बीजेपी यूनिट के 8 नेताओं ने प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के हालिया फैसलों के विरोध में पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वाले नेताओं का मानना है कि लक्षद्वीप प्रशासक का फैसला मनमाना है और इससे केंद्रशासित प्रदेश की संस्कृति और शांति बर्बाद हो जाएगी। बीफ बैन, एंटी गुंडा एक्ट, पंचायत चुनावों में योग्यता, डेवलपमेंट अथॉरिटी में संशोधन जैसे प्रस्तावों को लेकर राजनीतिक दल प्रफुल्ल पटेल का विरोध कर रहे हैं। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया है कि आने वाले दिनों में पार्टी से और भी इस्तीफे आ सकते हैं क्योंकि लोकल बीजेपी यूनिट द्वारा प्रशासन की जनविरोधी गतिविधियों को ‘एक्सपोज करने’ की कोशिशों के बाद भी केंद्र सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिल पाया है।

मंगलवार को जिन बीजेपी नेताओं ने इस्तीफा दिया, उनमें केरल के पूर्व पार्टी उपाध्यक्ष एम सी मुथुकोया, कोषाध्यक्ष बी शुक्कूर, भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व महासचिव मोहम्मद हाशिम भी हैं।

बीजेपी नेताओं का इस्तीफा बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एपी अब्दुल्लाकुट्टी और केरल बीजेपी के अध्यक्ष के सुरेंद्रन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। एपी अब्दुल्लाकुट्टी लक्षद्वीप बीजेपी के प्रभारी भी हैं। दोनों नेताओं ने दावा किया था कि केरल में मुस्लिम संगठनों और लेफ्ट पार्टियों के द्वारा अपने एजेंडे के लिए द्वीप का मुद्दा बनाया गया है। अब्दुल्लाकुट्टी ने यह भी कहा था कि प्रशासक प्रफुल्ल पटेल लक्षद्वीप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के सपनों को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने बीजेपी नेताओं को नहीं दिया जवाब

बीजेपी लक्षद्वीप यूनिट ने प्रफुल्ल पटेल की नीतियों के खिलाफ शिकायत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को 20 अप्रैल को पत्र लिखा था। पत्र में मांग की गई थी कि बीफ बैन और स्कूलों को बंद करने के फैसले में केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे। लेकिन जिन नेताओं ने पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, उन्हें कोई जवाब नहीं मिला था। बीजेपी लक्षद्वीप यूनिट ने प्रफुल्ल पटेल की नीतियों के खिलाफ शिकायत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को 20 अप्रैल को पत्र लिखा था।

केरल में एलडीएफ और कांग्रेस के सांसदों के साथ-साथ लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल पीपी ने प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के फैसलों के खिलाफ आवाज उठाई और इसे ‘तानाशाही रवैया’ बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है कि उन्हें वापस बुलाया जाए और उनके प्रस्तावों की समीक्षा की जाए। मोहम्मद फैजल ने कहा कि प्रशासक ने इस तरह के फैसले और प्रस्तावित नियमों के ड्राफ्ट बनाने से पहले जनप्रतिनिधियों से सलाह नहीं ली।

बीफ का उपयोग करने पर जेल की सजा

दादर एवं नगर हवेली और दमन एवं द्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल को पिछले साल दिसंबर में लक्षद्वीप की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद से ही वे लक्षद्वीप एनिमल प्रिजर्वेशन रेगुलेशन, लक्षद्वीप प्रिवेंशन ऑफ एंटी-सोशल ऐक्टिविटीज रेगुलेशन, लक्षद्वीप डेवलेपमेंट अथॉरिटी रेगुलेशन और लक्षद्वीप पंचायत स्टाफ रूल में संशोधन जैसे ड्राफ्ट ला चुके हैं। ड्राफ्ट में एक प्रस्ताव है कि जिनके दो से ज्यादा बच्चे होंगे, वो पंचायत चुनाव में भाग नहीं ले सकते।

लक्षद्वीप एनिमल प्रिजर्वेशन रेगुलेशन ड्राफ्ट के तहत बीफ पर प्रस्तावित प्रतिबंध ने केंद्रशासित प्रदेश में अशांति पैदा कर दी है। लक्षद्वीप में 90 फीसदी से ज्यादा आबादी मुस्लिमों की है। ड्राफ्ट के अनुसार, कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से बीफ या बीफ उत्पादों को लक्षद्वीप में कहीं भी बेच, खरीद, स्टोर या उसका ट्रांसपोर्ट नहीं कर सकता है। ड्राफ्ट संबंधित अधिकारी को यह शक्ति देता है कि ट्रांसपोर्ट किए जा रहे बीफ को सीज कर सकता है। दोषी व्यक्ति को 7 से 10 साल तक की सजा हो सकती है और साथ ही 1 लाख से 5 लाख रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।

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