Indore News: कांग्रेस नेता राहुल गांधी शनिवार को इंदौर दौरे पर पहुंचे। यहां उन्होंने दूषित पानी पीने से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। भागीरथपुरा में पीड़ितों का दर्द बांटते हुए राहुल ने सरकार के ‘स्मार्ट सिटी मॉडल’ पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर यह कैसा विकास है, जहां लोगों को पीने का साफ पानी तक नहीं मिल रहा और जहरीला पानी पीने से मौतें हो रही हैं। राहुल ने इसे सरकार की बड़ी विफलता बताया।
‘क्या यही है आपका अर्बन मॉडल?’
भागीरथपुरा की संकरी गलियों में पैदल चलकर राहुल गांधी पीड़ित परिवारों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार आए दिन ‘अर्बन मॉडल’ और स्मार्ट सिटी की बातें करती है। लेकिन सच्चाई यह है कि स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले शहर में लोगों को पीने का साफ पानी तक नसीब नहीं है।
राहुल गांधी ने कहा कि पानी पीकर लोगों की जान जा रही है। यह स्थिति सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई शहरों का यही हाल है। नागरिकों को शुद्ध हवा और साफ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी है, जिसे निभाने में वह पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
पीड़ितों ने सुनाई आपबीती, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
राहुल गांधी सबसे पहले गीता बाई के घर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया। इसके बाद वे पैदल ही जीवनलाल के घर गए। बाद में उन्होंने संस्कार उद्यान में अन्य पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात की।
रहवासियों ने राहुल को बताया कि अभी भी इलाके में नलों से गंदा पानी आ रहा है। लोग मजबूरन यही पानी पी रहे हैं। पीड़ितों ने रोते हुए कहा कि असली दोषियों को बचाया जा रहा है। हमारे जो परिजन चले गए, उनकी आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। एक दिन पहले ही थोड़ा साफ पानी आया, लेकिन अधिकारी अब भी पानी उबालकर पीने की सलाह दे रहे हैं।
अस्पताल में जाना मरीजों का हाल
इससे पहले, इंदौर एयरपोर्ट से सीधे राहुल गांधी बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचे। यहां आईसीयू में भर्ती 8 मरीजों का हाल जाना। इनमें से 3 की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इस दौरान उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, दिग्विजय सिंह और उमंग सिंघार भी मौजूद रहे। कांग्रेस पार्टी की ओर से पीड़ित परिवारों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की जानकारी भी दी गई है।
गांधी प्रतिमा पर मौन उपवास
इस दौरे के दौरान राहुल गांधी ने मनरेगा योजना का नाम बदले जाने का भी विरोध किया। वे गांधी प्रतिमा के सामने मौन उपवास पर बैठे। कांग्रेस ने इसे एक प्रतीकात्मक विरोध बताया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी लड़ाई तेज करने का संकेत दिया।

