Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर के अपमान मामले में एक बड़ा निर्णय दिया है। अदालत ने गिरफ्तार वकील अनिल मिश्रा की जमानत याचिका पर फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया है। मिश्रा ग्वालियर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हैं और इसी मामले में जेल में बंद हैं।
चार जनवरी को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद पुलिस को केस डायरी सहित तलब किया है। राज्य सरकार से भी जवाब मांगा गया है। सरकार की ओर से कोर्ट में समय मांगा गया। इसके बाद अदालत ने चार जनवरी को मामले की सुनवाई तय की है।
रविवार को होने वाली इस सुनवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वकील अनिल मिश्रा और उनके साथी जेल से बाहर आ पाएंगे या नहीं। अदालत ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं को कोई तात्कालिक राहत नहीं दी है। यह फैसला सुनवाई के दौरान सामने आया।
याचिकाकर्ताओं की प्रमुख दलीलें
जेल में बंद अनिल मिश्रा और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने कई दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। पहले गिरफ्तारी की गई और बाद में एफआईआर दर्ज की गई। परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना समय पर नहीं दी गई।
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि एससी-एसटी एक्ट के तहत नोटिस देकर छोड़ने का प्रावधान है। लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका तर्क था कि पुलिस ने कानून का उल्लंघन किया है। इस आधार पर उन्होंने जमानत की मांग की थी।
चार आरोपी गिरफ्तार, तीन अभी फरार
डॉ. अंबेडकर के चित्र को जलाने और पैरों से कुचलने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया गया। आरोपियों में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ग्वालियर के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा शामिल हैं।
अदालत ने अनिल मिश्रा को मेडिकल आधार पर अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश दिया। अन्य तीन आरोपियों को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने इस मामले में सात नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। तीन आरोपी अभी भी फरार हैं।
गंभीर धाराओं में दर्ज है मामला
पुलिस ने इस मामले में एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोपियों पर डॉ. अंबेडकर के चित्र को जलाने, पैरों से कुचलने और अपमानजनक नारे लगाने के आरोप हैं। यह घटना सामाजिक सौहार्द्र के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है।
फरार चल रहे आरोपियों में से चार को पुलिस ने देर रात गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई पुलिस की विशेष टीम ने की। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। सभी आरोपियों पर संज्ञेय अपराधों के मामले दर्ज हैं।
हाईकोर्ट की विशेष पीठ कर रही सुनवाई
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की विशेष पीठ कर रही है। पीठ ने पुलिस से सभी संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। राज्य सरकार को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। चार जनवरी को होने वाली सुनवाई इस मामले के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगी।
अदालत ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं को राहत न देने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ यह है कि आरोपी अगली सुनवाई तक जेल में ही रहेंगे। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला किया है। सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को विस्तृत सुनवाई का मौका मिलेगा।
सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
इस मामले ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की है। कई संगठनों ने आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। डॉ. अंबेडकर के अनुयायी इस घटना से आहत हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।
पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पर्याप्त बल तैनात किए हैं। किसी भी प्रकार की अशांति को रोकने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। यह मामला राज्य की कानून व्यवस्था के लिए एक चुनौती बना हुआ है।
