Uttar Pradesh News: दहेज के लिए प्रताड़ित एक महिला ने न्याय की गुहार लगाई है। तिलहर की रहने वाली गुलफ्सां का आरोप है कि उसे और उसके डेढ़ साल के बेटे को घर से निकाल दिया गया। परिवार के सामने ही उसके पति ने उसे तीन तलाक दे दिया। पूरी घटना का वीडियो मोबाइल से रिकॉर्ड किया गया है। पीड़िता ने स्थानीय कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है।
गुलफ्सां ने पुलिस को बताया कि चार साल पहले उसकी शादी अब्दुल कलीम से हुई थी। शादी में परिजनों ने हैसियत के मुताबिक दहेज दिया। लेकिन ससुराल पक्ष इससे संतुष्ट नहीं था। शादी के कुछ समय बाद ही नई मांगें शुरू हो गईं। उस पर लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का दौर चला।
मोटरसाइकिल और नकद रुपये की थी मांग
पीड़िताने बताया कि उसके पति, सास, देवर और ननद ने बुलेट मोटरसाइकिल और एक लाख रुपये की मांग रखी। जब मायके वालों ने यह मांग पूरी करने से इनकार किया तो प्रताड़ना बढ़ गई। उसे मारपीट और गाली गलौज का सामना करना पड़ा। कई बार पंचायत के जरिए मामला सुलझाने की कोशिश हुई।
हर बार समझौता होने के बाद भी ससुराल वालों का व्यवहार नहीं बदला। प्रताड़ना का सिलसिला लगातार जारी रहा। सोमवार शाम करीब साढ़े छह बजे स्थिति और बिगड़ गई। आरोपियों ने गुलफ्सां के साथ फिर मारपीट की। उसे और उसके बेटे को घर से बाहर निकाल दिया गया।
परिवार के सामने दिया गया तीन तलाक
इसकेबाद गुलफ्सां के पिता को फोन कर बुलाया गया। सूचना मिलते ही उसके माता पिता और भाई ससुराल पहुंचे। उन्होंने पति और ससुराल वालों को समझाने की कोशिश की। लेकिन सभी एकजुट होकर गाली गलौज करने लगे। तभी सास, ननद और देवर ने पति से कहा कि इसे तीन तलाक दे दो।
आरोप है कि इसके बाद पति अब्दुल कलीम ने कहा कि मैं अपने होशोहवास में गुलफ्सां तुम्हें तलाक देता हूं। उन्होंने तीन बार तलाक का उच्चारण किया। यह पूरी घटना गुलफ्सां के भाई के मोबाइल में रिकॉर्ड हो गई। इस वीडियो ने मामले को नया मोड़ दिया है।
पुलिस में दर्ज कराई शिकायत
गुलफ्सांने स्थानीय कोतवाली पहुंचकर इंसाफ की गुहार लगाई है। उसने पति अब्दुल कलीम, सास शाहीन, देवर अजीम और ननद कुलसुम व अलकमा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में दहेज के लिए प्रताड़ना और तीन तलाक जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य सबूतों की जांच की जा रही है। पीड़िता के परिवार ने त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कानून के तहत दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। यह मामला एक बार फिर दहेज और तीन तलाक की सामाजिक बुराई को उजागर करता है।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल
इस घटनाने स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू कर दी है। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में कड़ी सजा जरूरी है। दहेज और तीन तलाक जैसी प्रथाएं समाज के लिए कलंक हैं। कानून इनके खिलाफ सख्त प्रावधान रखता है।
कार्यकर्ताओं ने पीड़िता को हर संभव कानूनी मदद देने का आश्वासन दिया है। उनका मानना है कि इस तरह के मामले सामने आने से समाज में जागरूकता आती है। लोग कानूनी अधिकारों के प्रति सजग होते हैं। पुलिस प्रशासन को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
क्या कहता है कानून
भारतीय कानून दहेज केमामले में कड़ी सजा का प्रावधान करता है। दहेज निषेध अधिनियम 1961 इसके खिलाफ है। तीन तलाक को भी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित किया है। संसद ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया है। इसमें तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
पीड़िता इन दोनों कानूनों के तहत न्याय मांग सकती है। वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे सबूत मामले को मजबूत बनाते हैं। पुलिस को आरोपियों के खिलाफ धाराओं के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। समाज के हर वर्ग को ऐसी प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

