Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का ‘अमेरिका ग्रेट अगेन’ का सपना अब वहां के लोगों के लिए ही मुसीबत बन गया है। ट्रंप की ‘जीरो इमिग्रेशन’ पॉलिसी ने देश की रफ्तार रोक दी है। बॉर्डर सील होने और सख्त नियमों के कारण अमेरिका में काम करने वालों का भारी टोटा पड़ गया है। हालात ये हैं कि अस्पतालों में इलाज के लिए डॉक्टर नहीं हैं और होटलों में खाना बनाने वाले रसोइए नहीं मिल रहे। Donald Trump प्रशासन की सख्ती के कारण सालाना आने वाले प्रवासियों की संख्या 30 लाख से घटकर महज 4.5 लाख रह गई है।
वीजा नियमों के डर से भागे लोग
अमेरिका में साल 2024 तक विदेश में जन्मे लोगों की आबादी करीब 14.8 फीसदी थी। लेकिन Donald Trump के सत्ता में आते ही आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) ने आक्रामक तलाशी अभियान शुरू कर दिया। शहरों से लेकर गांवों तक दहशत का माहौल है। जो लोग बरसों से अमेरिका में रह रहे थे, उन्हें भी अब देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। बाइडन सरकार में मिली कानूनी राहत खत्म होने से लाखों लोगों पर किसी भी वक्त देश से निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा है।
अस्पतालों में ताला लटकने की नौबत
इस नीति का सबसे बुरा असर हेल्थ सिस्टम पर पड़ा है। Donald Trump की नीतियों के कारण विदेशी डॉक्टर और नर्स अमेरिका आने से कतरा रहे हैं। वेस्ट वर्जीनिया के अस्पतालों में 20 फीसदी नर्सिंग पद खाली पड़े हैं। वेंडालिया हेल्थ नेटवर्क से जुड़े कई कार्डियोलॉजिस्ट ने सिर्फ इसलिए नौकरी छोड़ दी, क्योंकि उन्हें वीजा का भरोसा नहीं था। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि मशीनें इलाज नहीं कर सकतीं, इसके लिए इंसान चाहिए। अगर यही हाल रहा तो अमेरिका का स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह बिखर जाएगा।
स्कूल और कॉलेज भी हुए खाली
शिक्षा के क्षेत्र में भी सन्नाटा पसर रहा है। लॉस एंजिलिस और न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों में प्रवासी परिवार डर के मारे बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे। छात्रों की कमी से स्कूलों में टीचर्स की नौकरी खतरे में पड़ गई है। वहीं, विदेशी छात्रों के न आने से यूनिवर्सिटीज का बजट बिगड़ गया है। टेनेसी के मेम्फिस में तो बच्चों की कमी के कारण लोकल फुटबॉल की टीमें तक नहीं बन पा रही हैं।
महंगाई की मार झेलने को रहें तैयार
अमेरिका के खेतों और निर्माण कार्यों में मजदूरों का संकट गहरा गया है। लुइसियाना में बढ़ई नहीं मिल रहे हैं, तो पेंसिल्वेनिया में खेतों में काम करने वाला कोई नहीं है। किसान ल्यूक बताते हैं कि 10 लोगों की जरूरत पर मुश्किल से एक अमेरिकी आवेदन करता है। Donald Trump की इस नीति से सप्लाई चेन टूट रही है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मजदूरों की कमी से उत्पादन घटेगा और चीजों के दाम आसमान छूने लगेंगे।
प्रवासियों का दर्द: न घर के, न घाट के
हजारों प्रवासी अब सिस्टम के बाहर धकेल दिए गए हैं। आयोवा में रहने वाले यूक्रेनी इंजीनियर सर्गेई फेडको की अच्छी-खासी जिंदगी अधर में लटक गई है। पैरोल बढ़ाने के लिए उन्हें हजारों डॉलर खर्च करने पड़े। हैती और वेनेजुएला के लोग न तो काम कर पा रहे हैं और न ही अपने देश लौट सकते हैं। विशेषज्ञ इसे 1992 जैसे हालात बता रहे हैं, जब अमेरिका दुनिया से कट गया था और उद्योग सिकुड़ गए थे।
