Washington News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने वेनेजुएला में जो किया, उससे पूरी दुनिया सन्न है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक संप्रभु राष्ट्र के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से गिरफ्तार करवाकर अमेरिका की जेल में डाल दिया है। इस घटना ने वैश्विक कूटनीति में एक नई और खतरनाक अराजकता को जन्म दिया है। अब यह डर सताने लगा है कि डोनाल्ड ट्रंप की देखादेखी दुनिया के अन्य ताकतवर देश भी अपने दुश्मन देशों के प्रमुखों को इसी तरह ‘उठवा’ सकते हैं। यह मॉडल अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाने वाला साबित हो रहा है।
चीन भी अपना सकता है ‘वेनेजुएला मॉडल’
डोनाल्ड ट्रंप की इस कार्रवाई से चीन सबसे ज्यादा खुश नजर आ रहा है। आशंका जताई जा रही है कि चीन अब ताइवान में इसी मॉडल को लागू कर सकता है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और हाल ही में उसने ताइवान को चारों तरफ से घेरकर सैन्य अभ्यास भी किया था। अब डर यह है कि जिस तरह अमेरिका ने मादुरो को पकड़ा, उसी तरह चीन ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते का अपहरण करवा सकता है। भारत में चीनी राजदूत के बयान भी इसी मंशा की ओर इशारा करते हैं।
तुर्किए और पाकिस्तान भी कतार में
यह खतरा सिर्फ ताइवान तक सीमित नहीं है। तुर्किए के राष्ट्रपति अर्दोआन की नजर अपने पड़ोसी साइप्रस और ग्रीस पर है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सेट किए गए इस नए ट्रेंड का फायदा उठाते हुए अर्दोआन भी साइप्रस के राष्ट्रपति या ग्रीस के पीएम के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। वहीं, पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर भी अफगानिस्तान के तालिबान प्रमुख मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा के खिलाफ ऐसी ही साजिश रच सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप की यह नीति दुनिया भर में नए युद्ध के मोर्चे खोल सकती है।
छोटे देशों पर मनमानी का खतरा बढ़ा
इस अराजक मॉडल का असर दिखने भी लगा है। बुर्किना फासो में हाल ही में तख्तापलट की कोशिश हुई है, जिसके पीछे फ्रांस का हाथ होने का आरोप लगा है। डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के विस्तारवादी देशों को एक रास्ता दिखा दिया है कि वे अपनी ताकत के दम पर छोटे देशों को दबा सकते हैं। अजरबैजान भी आर्मेनिया के खिलाफ इसी तरह की आक्रामक रणनीति अपना सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं का महत्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
शांतिदूत के भेष में बरसाए 600 से ज्यादा बम
हैरानी की बात यह है कि खुद को शांतिदूत बताने वाले डोनाल्ड ट्रंप का रिकॉर्ड बेहद हिंसक रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर विदेशी धरती पर 622 बार बमबारी की गई है। सीरिया, नाइजीरिया, सोमालिया और यमन में अमेरिकी हमलों ने भारी तबाही मचाई है। जुबान पर शांति की बात करने वाले डोनाल्ड ट्रंप असल में दुनिया को एक खतरनाक दौर में धकेल रहे हैं, जहां ताकत ही एकमात्र कानून है।
