Washington News: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के हाथ में एक नया और खतरनाक हथियार आ गया है। इसे ‘Sanctioning Russia Act of 2025’ का नाम दिया गया है। जानकारों के मुताबिक, यह बिल सिर्फ रूस के लिए नहीं, बल्कि भारत और चीन जैसे देशों के लिए भी खतरे की घंटी है। रिपब्लिकन पार्टी इस बिल का जोर-शोर से प्रचार कर रही है। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को 500 फीसदी तक टैक्स (Tariff) लगाने की ताकत देने की बात कही गई है। यह कानून भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को सीधी चुनौती दे सकता है।
क्या है यह खतरनाक बिल?
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने 1 अप्रैल 2025 को अमेरिकी सीनेट में यह बिल पेश किया था। इसका मुख्य उद्देश्य रूस को यूक्रेन के साथ शांति समझौते के लिए मजबूर करना है। बिल के मुताबिक, अगर Donald Trump यह तय करते हैं कि रूस शांति वार्ता से भाग रहा है, तो यह कानून अपने आप लागू हो जाएगा। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के शीर्ष नेताओं, सैन्य कमांडरों और रूसी बैंकों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की खुली छूट मिल जाएगी।
भारत के लिए क्यों है खतरे की घंटी?
इस बिल का सबसे डराने वाला हिस्सा 500% ड्यूटी (Tax) का प्रावधान है। यह टैक्स सिर्फ रूस पर नहीं, बल्कि उन देशों पर भी लगाया जा सकता है जो रूसी तेल या पेट्रोलियम उत्पाद खरीदते हैं। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से भारी मात्रा में डिस्काउंट वाला कच्चा तेल खरीदता है। यह बिल भारत की इसी नीति को निशाना बनाता है। अगर यह लागू हुआ, तो अमेरिका भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव डालेगा। अमेरिका का मानना है कि तेल खरीदकर देश “पुतिन की वॉर मशीन” को फंड कर रहे हैं।
ट्रंप का ‘टैरिफ वाला हथियार’
Donald Trump ने सोशल मीडिया पर इस बिल का खुला समर्थन किया है। सीनेटर ग्राहम ने कहा कि ट्रंप का साथ मिलना उनके लिए बहुत मायने रखता है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के लिए टैरिफ एक ‘स्विस मिलिट्री नाइफ’ की तरह है। वे इसका इस्तेमाल सिर्फ व्यापार के लिए नहीं, बल्कि जियोपॉलिटिकल प्रेशर बनाने के लिए कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि दुनिया उनकी शर्तों पर कारोबार करे। ट्रंप और ग्राहम की यह दोस्ती भारत के लिए कूटनीतिक सिरदर्द बन सकती है।
किन सेक्टर पर पड़ेगी सबसे ज्यादा मार?
अगर 500% टैरिफ का नियम सख्ती से लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों की कमर टूट जाएगी।
- टेक्सटाइल सेक्टर: भारत के कपड़ा उद्योग का बड़ा हिस्सा अमेरिका पर निर्भर है। टैक्स बढ़ने से यह ठप हो सकता है।
- ऑटो और इंजीनियरिंग: भारत से अमेरिका जाने वाले ऑटो पार्ट्स और मशीनों की कीमतें कई गुना बढ़ जाएंगी।
- फार्मा सेक्टर: हालांकि दवाओं पर ट्रंप थोड़ा नरम रह सकते हैं, लेकिन रेगुलेटरी प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
क्या वाकई लागू होगा 500% टैक्स?
जानकारों का मानना है कि Donald Trump के लिए भी इतना भारी टैक्स लगाना आसान नहीं होगा। इससे अमेरिका की अपनी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचेगी और वहां महंगाई बेकाबू हो सकती है। डेमोक्रेट और कई रिपब्लिकन सांसद भी इसके खिलाफ हैं। यह बिल फिलहाल एक कूटनीतिक दबाव बनाने का ‘भौंपू’ ज्यादा लगता है। अमेरिका चाहता है कि भारत अपना बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोले और रूस से दूर रहे। हालांकि, यह बिल अमेरिका के इरादों को साफ जाहिर करता है।
