World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने एक राष्ट्रपति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत अमेरिका 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संधियों से अलग होगा। इसमें भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस भी शामिल है।
वाइट हाउस के अनुसार ये संगठन अमेरिकी हितों के अनुरूप नहीं रहे। इनमें अमेरिकी करदाताओं के पैसे का सही उपयोग नहीं हो रहा था। इस निर्णय के तहत अमेरिका 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों से हटेगा। साथ ही 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़े निकायों से भी अलग होगा।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस और अन्य प्रमुख संगठन
गैर-यूएन संगठनों की सूची में इंटरनेशनल सोलर अलायंस प्रमुख है। यह भारत और फ्रांस की संयुक्त पहल है जो 2015 में शुरू हुई। इसके अलावा अमेरिका इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर से हटेगा। इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज से भी अलग होगा।
इनमें इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी और इंटरनेशनल एनर्जी फोरम भी शामिल हैं। पार्टनरशिप फॉर अटलांटिक कोऑपरेशन से भी अमेरिका अपनी सदस्यता वापस लेगा। ग्लोबल काउंटर टेररिज्म फोरम से भी अलग होने का फैसला किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े निकायों से अलगगी
राष्ट्रपति ज्ञापन में कई यूएन निकायों का उल्लेख है। अमेरिका डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स से हटेगा। इंटरनेशनल लॉ कमीशन और इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर से भी अलग होगा। यूएन पीसबिल्डिंग कमीशन से भी सदस्यता समाप्त की जाएगी।
यूएन एनर्जी और यूएन वॉटर जैसे निकाय भी इस सूची में हैं। यूएन पॉपुलेशन फंड से भी अमेरिका अपना संबंध तोड़ेगा। ज्ञापन में सभी कार्यकारी विभागों को शीघ्र कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
इन संगठनों में अमेरिकी भागीदारी और वित्त पोषण समाप्त किया जाएगा। यह प्रक्रिया कानूनी अनुमति की सीमा के भीतर पूरी होगी। इस कदम को अमेरिकी विदेश नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
भारत के लिए संभावित प्रभाव
इंटरनेशनल सोलर अलायंस भारत की एक प्रमुख वैश्विक पहल है। इसके 100 से अधिक सदस्य देश हैं। अमेरिका का इससे अलग होना सौर ऊर्जा सहयोग को प्रभावित कर सकता है। हालांकि आईएसए ने अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जलवायु परिवर्तन के वैश्विक प्रयासों को कमजोर करेगा। अमेरिका का समर्थन वापस लेने से कई परियोजनाओं को धक्का लग सकता है। अन्य देशों पर अब अधिक वित्तीय भार आ सकता है।
ट्रंप प्रशासन का रिकॉर्ड और नीतिगत दृष्टिकोण
यह फैसला कैबिनेट और विदेश मंत्री की रिपोर्ट के बाद लिया गया है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ये संगठन अमेरिकी हितों के विपरीत काम करते हैं। यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन पहले भी कई बहुपक्षीय संस्थानों से अलग हुआ है। इसमें पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलना शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी अमेरिका ने वापसी की प्रक्रिया शुरू की थी।
जनवरी 2025 में अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से वापसी की घोषणा की थी। प्रशासन ने कोविड-19 प्रबंधन को लेकर आपत्ति जताई थी। जुलाई 2025 में यूनेस्को से भी अमेरिका ने अपनी सदस्यता समाप्त कर ली थी।
इन फैसलों के पीछे तर्क यह दिया जाता है कि ये संस्थाएं वैश्विक एजेंडा को बढ़ावा देती हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह अमेरिकी संप्रभुता और आर्थिक ताकत के खिलाफ है। इसलिए अब नई दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

