Washington News: अमेरिका ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। यह ऑपरेशन Donald Trump के प्रशासन के दबाव अभियान का नतीजा है। मादुरो को 3 जनवरी को एक मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान पकड़ा गया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मादुरो को अब न्यूयॉर्क लाया गया है। वहां उन पर आपराधिक मामलों में मुकदमा चलाया जाएगा। इस घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है।
युद्धपोत से हुई गिरफ्तारी
खबरों के मुताबिक, मादुरो एक युद्धपोत पर थे। अमेरिकी सेना ने कार्रवाई करते हुए मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया। Donald Trump लंबे समय से मादुरो से सत्ता छोड़ने की मांग कर रहे थे। ट्रम्प ने उन पर ड्रग कार्टेल का समर्थन करने का आरोप लगाया था। वॉशिंगटन ने इन समूहों को आतंकवादी माना है। आरोप है कि ये समूह अवैध ड्रग्स के जरिए हजारों अमेरिकी नागरिकों की जान ले रहे थे।
क्या हैं मादुरो पर आरोप?
अमेरिकी न्याय विभाग ने मादुरो को पकड़ने के लिए सेना की मदद मांगी थी। न्यूयॉर्क की एक ग्रैंड जूरी ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसमें आतंकवाद, ड्रग्स तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराध शामिल हैं। अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने कहा कि आरोपी जल्द ही अमेरिकी अदालत का सामना करेंगे। वहीं, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में Donald Trump ने वेनेजुएला पर अमेरिकी तेल हितों को चुराने का आरोप भी लगाया। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका कुछ समय के लिए वहां की व्यवस्था संभाल सकता है।
कानून के जानकारों ने उठाए सवाल
इस कार्रवाई पर अब सवाल भी उठ रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि Donald Trump प्रशासन ने इसे पुलिस एक्शन बताकर कानूनी पेच फंसा दिया है। नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेरेमी पॉल ने इसे बेतुका बताया है। उनका कहना है कि आप इसे कानून लागू करना नहीं कह सकते और फिर देश चलाने की बात करें। वहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि इस ऑपरेशन की जानकारी कांग्रेस को पहले नहीं दी गई थी।
पहले भी हुए ऐसे ऑपरेशन
अमेरिका ने पहले भी ऐसे कदम उठाए हैं। साल 1989 में पनामा के जनरल मैनुअल नोरिएगा को भी ऐसे ही हालात में पकड़ा गया था। उन पर भी ड्रग्स के आरोप थे। हालांकि, तब अमेरिका ने पनामा के बलों द्वारा अमेरिकी सैनिक को मारने का हवाला दिया था। इसके अलावा 2022 में होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति को भी अमेरिका लाया गया था। अब Donald Trump के इस नए कदम पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।

