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Donald Trump: वेनेजुएला के बाद अब इस देश पर नजर, ट्रंप की धमकी से मचा हड़कंप!

World News: वेनेजुएला में तख्तापलट के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने अब खुले तौर पर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात दोहराई है। ट्रंप का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका को इस द्वीप की जरूरत है। इस बयान के बाद डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने ट्रंप से साफ कहा है कि वे धमकियां देना बंद करें।

सुरक्षा का दिया हवाला

Donald Trump ने ‘द अटलांटिक’ मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में अपनी इच्छा जाहिर की। उनका मानना है कि ग्रीनलैंड चारों तरफ से रूसी जहाजों से घिरा हुआ है। ऐसे में अमेरिका की सुरक्षा के लिए इस पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। यह बयान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के ठीक एक दिन बाद आया है। ट्रंप ने कहा था कि अब वाशिंगटन वेनेजुएला को चलाएगा। इस बात से डेनमार्क में डर है कि कहीं ग्रीनलैंड के साथ भी ऐसा ही न हो।

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डेनमार्क ने कहा- बिकाऊ नहीं है ग्रीनलैंड

डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने रविवार को एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि Donald Trump का ग्रीनलैंड पर हक जताना बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है। डेनमार्क के अधीन आने वाले किसी भी देश को अमेरिका अपने में नहीं मिला सकता। उन्होंने अपील की है कि एक ऐतिहासिक सहयोगी देश के खिलाफ ऐसी बयानबाजी तुरंत बंद होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। हालांकि, ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री कार्यालय ने अभी चुप्पी साधी हुई है।

रणनीतिक रूप से क्यों है खास?

यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच बसा यह द्वीप बहुत खास है। यहाँ अमेरिका की मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए अहम जगह है। साथ ही यहाँ भारी मात्रा में खनिज संसाधन मौजूद हैं। अमेरिका चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए इन खनिजों का इस्तेमाल करना चाहता है। Donald Trump ने हाल ही में जेफ लैंड्री को यहाँ का विशेष दूत बनाया था। इसके बाद से ही डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अमेरिका की आलोचना तेज कर दी थी।

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क्या ग्रीनलैंड हो सकता है अलग?

ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक पूर्व उपनिवेश है। साल 2009 के एक समझौते के तहत इसे आजादी घोषित करने का हक है। हालांकि, यह अभी भी आर्थिक मदद के लिए डेनमार्क पर काफी निर्भर है। Donald Trump लंबे समय से इसे अमेरिका का हिस्सा बनाने की वकालत कर रहे हैं। डेनमार्क की खुफिया एजेंसी ने तो अमेरिका को 2026 में संभावित खतरे वाले देशों की लिस्ट में भी डाल दिया था।

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