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ब्लैक फंगस से बचाव के लिए एम्स डायरेक्टर ने बताए तीन तरीके, जानें इस बीमारी के गंभीर लक्षण

कोरोना मरीजों में ब्लैक फंगस के केस बढ़ने लगे हैं। ऐसे में आम लोगों को इस बीमारी से जागरूक करने के लिए देश के दो जाने-माने हेल्थ एक्सपर्ट्स ने आज इस पर विस्तार से बात की।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया और मशहूर अस्पताल मेदांता के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन ने ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस को लेकर जानकारी दी है.
 

स्टेरॉयड का ज्यादा इस्तेमाल न करें 
ब्लैक फंगस के बचाव के तरीकों पर बात करने के लिए डॉ. रणदीप गुलेरिया ने ब्लैक फंगस से बचने के लिए तीन महत्वपूर्ण तथ्य सभी के सामने रखे हैं।

उन्होंने बताया कि ब्लड शुगर लेवल का अच्छा नियंत्रण, जो स्टेरॉयड पर हैं, वो रोजाना ब्लड शुगर लेवल चेक करें और इस बात का ध्यान रखें कि स्टेरॉयड कब देना है और कितनी खुराकें देनी हैं

इन दावों में नहीं है कोई सच्चाई 
डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि ब्लैक फंगस को लेकर कई झूठ दावे फैलाए जा रहे हैं कि ये कच्चा खाना खाने से हो रहा है लेकिन इसकी पुष्टि करने के लिए कोई आंकड़ा नहीं है। वहीं ऑक्सीजन के इस्तेमाल से भी इसका कोई लेना-देना नहीं है। ये होम आइसोलेशन में रहने वाले लोगों के बीच भी हो रहा है।

ब्लैक फंगस के लक्षण
मेदांता के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहान ने बताया कि कोविड मरीज को हुए म्यूकोरमाइकोसिस में पहले लक्षण दर्द, नाक में भरापन, गालों पर सूजन, मुंह के अंदर फंगस का पैच और पलकों में सूजन है। इसके लिए सख्त मेडिकल इलाज की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि ब्लैक फंगस को नियंत्रित करने की कूंजी स्टेरॉयड का विवेकपूर्ण इस्तेमाल और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करना है।

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