कांग्रेस चिंतन शिविर में मुस्लिम नेताओं के मोहभंग पर चर्चा

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RIGHT NEWS INDIA: राजस्थान में कांग्रेस पार्टी का तीन दिवसीय चिंतन शिविर चल रहा है और रविवार को चिंतन शिविर का आखिरी दिन है। इस चिंतन शिविर में कांग्रेस नेताओं द्वारा कई मांगे रखी गई और कई बातों पर अहम चर्चा की गई।

रविवार को चिंतन शिविर में लिए गए फैसलों को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा बयान जारी किया जा सकता है। वहीं चिंतन शिविर में बीजेपी के हिंदुत्व और कांग्रेस से मुस्लिम नेताओं के मोहभंग होने पर भी चर्चा की गई।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी को हिंदू त्योहारों को मनाने से शर्माना नहीं चाहिए, जैसा कि वह अपने राज्य में कर रहे हैं। लेकिन महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने अधिक वैचारिक स्पष्टता के लिए दबाव डाला। एक अन्य पार्टी सदस्य ने कहा कि मुस्लिम पार्टी के भ्रमित रुख के कारण पार्टी छोड़ रहे हैं। एक अन्य नेता ने कहा कि हिंदुत्व का जवाब देने की कोशिश कर रही पार्टी भाजपा की पिच पर बल्लेबाजी करने की कोशिश कर रही है। फिर भी एक अन्य नेता ने कथित तौर पर कहा कि हमें जवाब देना होगा क्योंकि अब बहस आगे तक चली गई है।

शनिवार को चिंतन शिविर के दूसरे दिन पार्टी में हिंदुत्व का मुद्दा और हिंदुत्व पर पार्टी की आगे की राह के बारे में ही अधिक चर्चा हुई। ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे को लेकर भी पार्टी ने कल प्रेस कॉन्फ्रेंस पर अपनी राय स्पष्ट की। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 1991 वर्शिप एक्ट का हवाला दिया और स्पष्ट रुख अपनाया कि किसी भी पूजा स्थल की स्थिति को बदलने का कोई प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन भाजपा के हिंदुत्व का मुकाबला कैसे किया जाए, इस बड़े सवाल पर, यहां चल रहे तीन दिवसीय चिंतन शिविर में आगे का रास्ता इतना स्पष्ट नहीं था।

सोनिया गांधी ने शुक्रवार को अपने उद्घाटन भाषण के दौरान पार्टी प्रतिनिधियों को खुले दिमाग से बोलने के लिए कहा था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी नेता यह सुनिश्चित करें कि उदयपुर से संगठन को मजबूत करना, दृढ़ संकल्प और एकता का संदेश निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हाल के चुनावी झटकों से बेखबर नहीं है।

वहीं उदयपुर में कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं की एक प्रमुख मांग मान ली गई है। दरअसल कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं की मांग थी कि पार्टी में केंद्रीय संसदीय बोर्ड का गठन होना चाहिए और अब पार्टी की बैठक में इसे एक सुझाव के रूप में स्वीकार कर लिया गया है। अब इस पर फैसला कांग्रेस वर्किंग कमेटी को लेना है, जो पार्टी के लिए अहम निर्णय करती है।


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