हिमाचल प्रदेश सरकार जितनी चाहे कोशिश कर ले, लेकिन जब तक पंचायतों में घोटालेबाज बैठे है तब तक विकास किसी भी हाल में संभव नही है। सरकार अरबों रुपये खर्च करके योजनाएं बनाती है, उनके किये बजट देती है और प्रदेश के हर गरीब तक सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश करती है। लेकिन पंचायतों में बैठे घोटालेबाज उन योजनाओं और सुविधाओं को गरीब लोगों के बजाय अमीरों में बांट देते है। मुख्यमंत्री ने भले ही फर्जी बीपीएल परिवारों पर प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दे रखे हो और कई जगह प्राथमिकी दर्ज भी हुई हो। लेकिन कई जगह अभी भी दीपक तले अंधेरा ही हैं।

ताजा मामला बिलासपुर जिले की बरमाणा पंचायत से सामने आया है, जहाँ एक लखपति महिला सालों से बीपीएल में है और उसको आज तक किसी प्रधान या पंचायत सचिव ने बीपीएल से नही निकाला। जानकारी के मुताबिक बरमाणा पंचायत की एक महिला का अपने पति से शिमला हाई कोर्ट में तलाक हुआ है और उसके एवज में उस स्त्री को 18 लाख रुपये की संपत्ति मिली है और उस संपति में हीरे की अंगूठी भी शामिल है। इस मामले के कागज तक उपलब्ध है। लेकिन फिर भी वह महिला आज तक बीपीएल में हैं और पूरी पंचायत उसका साथ दे रही है। प्रधान और सचिव उस स्त्री को बीपीएल से निकालने को तैयार नही है। जबकि वही के स्थानीय लोगों ने कई बार उपायुक्त बिलासपुर, पुलिस अधीक्षक बिलासपुर और मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को शिकायत कर चुके है।

कोर्ट के आदेशों से महिला को मिला डाइमंड

अभी हाल में ही स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक पंचायत सचिव उस महिला को सरकारी नौकरी दिलवाने के चक्कर में है। जिसके लिए उस महिला को ज़बरदस्ती बीपीएल में रखा गया है। ताकि उसको बीपीएल कोटे में कहीं भी नौकरी लगाया जा सके। इस मामले में राइट फाउंडेशन एनजीओ के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश, उपायुक्त बिलासपुर और एसडीएम बरमाणा को शिकायत भेज चुके है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि आज आठ दिन बीत जाने के बाबजूद भी कोई कार्यवाही उस महिला या दोषी अधिकारियों पर नही हुई है।

By RIGHT NEWS INDIA

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