New Delhi News: दिल्ली में अब हवा साफ करने की मुहिम केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगी। इससे सरकार को मोटी कमाई भी होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। सरकार ने ‘कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क’ को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत दिल्ली अपने ग्रीन प्रोजेक्ट्स के जरिए कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर पैसा कमा सकेगी। यह योजना पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक फायदे का भी सौदा साबित होगी।
क्या है कार्बन क्रेडिट का पूरा गणित?
आसान भाषा में समझें तो यह प्रदूषण कम करने का इनाम है। जब कोई संस्था या सरकार कार्बन उत्सर्जन घटाने वाला काम करती है, तो उसे ‘कार्बन क्रेडिट’ मिलता है। दिल्ली सरकार अब अपनी इलेक्ट्रिक बसों और सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स से होने वाली कार्बन बचत का हिसाब रखेगी। बड़े स्तर पर हो रहे पौधारोपण और कचरा प्रबंधन को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इस बचत को वैज्ञानिक तरीके से मापा जाएगा। इसके बाद इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर रजिस्टर करके ग्लोबल मार्केट में बेचा जाएगा।
बिना पैसा खर्च किए होगी कमाई
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी इसका फाइनेंशियल मॉडल है। दिल्ली सरकार को इसमें अपनी जेब से कोई पैसा नहीं लगाना होगा। यह सिस्टम पूरी तरह ‘रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल’ पर काम करेगा। पर्यावरण विभाग टेंडर के जरिए एक एक्सपर्ट एजेंसी नियुक्त करेगा। यह एजेंसी तय करेगी कि किस योजना से कितने कार्बन क्रेडिट बन सकते हैं। एजेंसी ही इन्हें मार्केट में बेचने का काम करेगी। बिक्री से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा एजेंसी को मिलेगा, जबकि बड़ा हिस्सा सरकार के पास आएगा।
विकास कार्यों में लगेगा पैसा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह पैसा सीधे जनता के काम आएगा। कार्बन क्रेडिट से होने वाली कमाई ‘राज्य के समेकित कोष’ (Consolidated Fund) में जमा होगी। इसका इस्तेमाल शहर की सड़कें सुधारने, ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बेहतर करने और अन्य विकास कार्यों में किया जाएगा। सरकार का मानना है कि दिल्ली इस मॉडल को अपनाने वाला देश का पहला बड़ा राज्य बन सकता है। इससे भारत की क्लाइमेट कमिटमेंट को भी मजबूती मिलेगी।
