New Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश-II से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ अमेरिका से लौटे एक बुजुर्ग NRI डॉक्टर दंपत्ति से साइबर ठगों ने 14.85 करोड़ रुपये लूट लिए। ठगों ने उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 17 दिनों तक उनके ही घर में ‘कैद’ रखा। पीड़ित डॉक्टर दंपत्ति ने अपनी जिंदगी भर की कमाई गंवा दी। पुलिस की जांच में पता चला है कि लूटी गई रकम को देश के सात अलग-अलग राज्यों में भेजा गया है।
24 दिसंबर को आई वो ‘खौफनाक’ कॉल
इस वारदाते की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को एक फोन कॉल से हुई। ठगों ने खुद को टेलिकॉम रेगुलेटर (TRAI) का अधिकारी बताया। उन्होंने बुजुर्ग दंपत्ति को डराया कि उनके नाम पर जारी सिम कार्ड से गलत काम हो रहा है। ठगों ने अश्लील वीडियो भेजने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आपके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। 77 वर्षीय डॉ. इंदिरा और 81 वर्षीय डॉ. ओम तनेजा इस धमकी से बुरी तरह घबरा गए।
7 राज्यों में बंटे लूट के 14 करोड़ रुपये
दिल्ली पुलिस की जांच में हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। ठगी की रकम को किसी एक खाते में नहीं रखा गया। इसे तुरंत सात राज्यों में घुमाया गया। सबसे बड़ी रकम 4 करोड़ रुपये गुजरात के वडोदरा ट्रांसफर की गई। इसके अलावा असम के गुवाहाटी में 1.99 करोड़ और दिल्ली के मयूर विहार में 2 करोड़ रुपये भेजे गए। मुंबई के पॉश इलाके नेपियन सी रोड स्थित एक खाते में 2.05 करोड़ ट्रांसफर हुए। ठगों ने यूपी, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड के खातों में भी करोड़ों रुपये भेजे।
500 खातों का मकड़जाल और शेल कंपनियां
साइबर अपराधियों ने पुलिस से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया। जिन खातों में पैसा गया, वे चैरिटेबल ट्रस्ट, केमिकल ट्रेडिंग और टूर-ट्रैवल्स कंपनियों के नाम पर थे। ये सब फर्जी या ‘शेल कंपनियां’ थीं। मुख्य खातों में पैसा आते ही उसे 500 से ज्यादा ‘म्यूल अकाउंट्स’ (किराये के खाते) में बांट दिया गया। पुलिस को उलझाने के लिए 10 से 500 रुपये तक के छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन किए गए। पुलिस ने अभी तक 1.41 करोड़ रुपये फ्रीज करवाए हैं।
अमेरिका से लौटे थे सुकून की तलाश में
डॉ. इंदिरा तनेजा अमेरिका के न्यू जर्सी में मेडिकल प्रोफेसर रह चुकी हैं। वहीं, उनके पति डॉ. ओम तनेजा ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अमेरिकी सरकार के लिए काम किया है। दोनों करीब 40 साल अमेरिका में रहने के बाद भारत लौटे थे। ठगों ने उनकी शराफत और कानून के डर का फायदा उठाया। उन्हें 9 जनवरी 2026 तक वीडियो कॉल पर नजरबंद रखा गया। जब तक उनके खाते पूरी तरह खाली नहीं हो गए, ठगों ने उन्हें नहीं छोड़ा।
