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हिमाचल प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू बढ़ाने पर फैसला आज, मुख्यमंत्री पर पाबंदियां घटाने का दबाव

हिमाचल प्रदेश में लागू कोरोना कर्फ्यू को बढ़ाने पर शनिवार को कैबिनेट फैसला लेगी। कर्फ्यू का दूसरे चरण में बढ़ना लगभग तय हो चुका है। मंत्रिमंडल इसकी समयावधि और बंदिशों में छूट या सख्ती पर निर्णय लेगा। इस कारण 15 मई को प्रस्तावित कैबिनेट पर सभी की निगाहें रहेंगी। प्रदेश में 17 मई तक लागू कोरोना कर्फ्यू के और आगे बढ़ने की पूरी संभावना है। इसके लिए राज्य सरकार के पास 10 दिन या एक सप्ताह के रूप में दो विकल्प रहेंगे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग कोरोना कर्फ्यू की समयावधि 14 दिन और बढ़ाने की सिफारिश कर सकता है। सख्तियों को लेकर भी सरकार के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। चूंकि स्वास्थ्य विभाग और कोविड में जुटी एजेंसियां और सख्ती के हक में हैं। इसके विपरीत कमजोर वर्ग तथा छोटे कारोबारी ढील के पक्ष में हैं। इस सूरत में सख्ती की जाए या कोरोना कर्फ्यू में ढील देने की बजाय सरकार के पास मौजूदा बंदिशों को बरकरार रखने का विकल्प हो सकता है।

इसी कारण मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने ईद की छुट्टी के तुरंत अगले दिन शनिवार को मंत्रिपरिषद को अहम चर्चा के लिए बुलाया है। इसी बीच सरकार के ऊपर बंदिशों में ढील और ज्यादा सख्तियों का भी एक बराबर दबाव आ रहा है। प्रदेश के कारोबारी और कंस्ट्रक्शन से जुड़े ठेकेदार व फर्में ढील का दबाव बना रही हैं। व्यापार मंडल सभी दुकानों को तीन से चार घंटे खोलने का आग्रह कर रहे हैं। जाहिर है कि कोरोना कर्फ्यू के चलते प्रदेश की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त झटका लग रहा है। विशेषकर शराब के ठेके बंद होने से राज्य सरकार को प्रतिदिन औसतन पांच करोड़ की चपत लग रही है। इसी कारण कई दूसरे राज्यों ने लॉकडाउन की बंदिशों के बावजूद शराब दुकानों को खुला रखने का निर्णय लिया है। बावजूद इसके समाज में सकारात्मक संदेश देने के लिए सरकार के लिए शराब ठेके खोलना आसान नहीं होगा।

इसके अलावा दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों की बॉर्डर पर एंट्री को लेकर भी मंत्रिमंडल में चर्चा संभव है। आईसीएमआर से जारी दिशा-निर्देशों के बाद केंद्र सरकार ने दूसरे राज्यों के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट का झंझट समाप्त कर दिया है। राज्य सरकार ने फिलहाल आरटीपीसीआर के स्थान पर अब रैपिड एंटीजन टेस्ट की शर्त लागू करने की बात कही है। इसके चलते इस व्यवस्था पर भी शनिवार की कैबिनेट में आधिकारिक मुहर संभावित है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में जरूरी सेवाओं की दुकानों को तीन घंटे के लिए खोला जा रहा है। राज्य में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से बंद रखा गया है। निजी वाहनों का भी आपात स्थिति में ही प्रयोग हो रहा है। बिना वजह आवाजाही पर प्रतिबंध है। मंत्रिमंडल को यही सबसे बड़ा फैसला लेना है कि क्या ये बंदिशें यथावत लागू रहेंगी या इनमें बदलाव होगा।

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