Patna News: पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की मौत की गुत्थी उलझ गई है। पुलिस ने शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया था। लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर गंभीर चोटों और दरिंदगी की बात सामने आई है। यह मामला अब हाई-प्रोफाइल ‘कवर-अप’ जैसा नजर आ रहा है। हॉस्टल के बाहर आने वाली लग्जरी गाड़ियों और रसूखदारों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। छात्रा के परिजन इंसाफ के लिए भटक रहे हैं, जबकि सिस्टम आरोपियों को बचाने में लगा है।
पुलिस की थ्योरी और पोस्टमार्टम का डरावना सच
पटना पुलिस ने पहले दावा किया था कि छात्रा ने नींद की गोलियां खाईं हैं। एएसपी और एसएसपी ने इसे ‘सुसाइड’ और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री से जोड़ा था। पुलिस ने शरीर पर चोट के निशान न होने की बात भी कही थी। लेकिन मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट ने पुलिस को झूठा साबित कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा की गर्दन पर नाखूनों के निशान मिले हैं। उसकी दाहिनी जुगुलर नस पंक्चर थी। छाती, जांघ और पीठ पर भी नीले निशान पाए गए हैं। सबसे भयावह बात यह है कि प्राइवेट पार्ट पर मिली चोटें जबरन शारीरिक संबंध और हैवानियत की गवाही दे रही हैं।
उस काली रात का सच क्या है?
मृतका ने 5 जनवरी की रात 9 बजे अपने माता-पिता से सामान्य रूप से बात की थी। लेकिन 6 जनवरी को वह हॉस्टल में संदिग्ध हालत में बेहोश मिली। इस दौरान क्या हुआ, यह बड़ा सवाल है। हॉस्टल की वार्डन नीतू ठाकुर ने छात्रा के माता-पिता को तुरंत सूचना नहीं दी। उसने छात्रा की सहेली के पिता को फोन किया। आखिर माता-पिता से सच क्यों छिपाया गया? क्या इस देरी का इस्तेमाल सबूत मिटाने के लिए किया गया?
हॉस्टल में लग्जरी गाड़ियों का रहस्य
स्थानीय लोगों के मुताबिक, शाम ढलते ही इस हॉस्टल के बाहर महंगी गाड़ियों की लाइन लग जाती थी। सवाल यह है कि इन गाड़ियों में कौन आता था? क्या इन्हीं रसूखदारों को बचाने के लिए ‘सुसाइड’ की कहानी रची गई? हॉस्टल मालिक मनीष रंजन और संचालक श्रवण अग्रवाल जांच के घेरे में हैं। पुलिस ने मनीष को गिरफ्तार तो किया, लेकिन उसे रिमांड पर लेकर सख्ती से पूछताछ नहीं की। आरोप है कि थानेदार रोशनी कुमारी ने भी रसूखदारों के दबाव में जांच को कमजोर किया।
अस्पताल और डॉक्टर की भूमिका संदिग्ध
छात्रा के इलाज में शामिल निजी अस्पतालों की भूमिका भी शक के दायरे में है। डॉक्टर सतीश की शुरुआती रिपोर्ट में चोट का जिक्र न होना संदेह पैदा करता है। छात्रा के मामा ने बताया कि अस्पताल में जब उसे होश आया, तो वह मां को देख रोने लगी थी। वह कुछ बताना चाहती थी, लेकिन बोल नहीं सकी। उसकी आंखों से सिर्फ आंसू बह रहे थे। सवाल उठता है कि क्या उसे हमेशा के लिए खामोश करने की साजिश रची गई थी?
एसआईटी के सामने खड़े हैं बड़े सवाल
अब मामले की जांच आईजी जितेंद्र राणा के नेतृत्व में एसआईटी (SIT) कर रही है। जांच टीम के सामने कई अनसुलझे सवाल हैं:
- वारदात के समय छात्रा ने जो कपड़े पहने थे, वे कहां गायब हैं?
- छात्रा के मोबाइल से डिलीट किया गया डेटा क्या राज खोलेगा?
- हॉस्टल के रजिस्टर से आने वालों के नाम क्यों नदारद हैं?
- गली वाले गेट पर सीसीटीवी कैमरा क्यों नहीं लगा था?
- विसरा रिपोर्ट आने से पहले पुलिस ने आत्महत्या का दावा कैसे किया?
अब एम्स के विशेषज्ञों की राय और फॉरेंसिक रिपोर्ट से ही सच सामने आएगा। लेकिन इस घटना ने बिहार की कानून व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
