Maharashtra News: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली रिपोर्ट सामने आई है। पिछले पांच सालों में यहां 5,000 से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं। मंडल आयुक्त कार्यालय की ताजा रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 किसानों के लिए काल साबित हुआ। केवल इसी एक साल में 1,129 अन्नदाताओं ने अपनी जान दे दी। यह पिछले पांच वर्षों में दर्ज किया गया सबसे बड़ा आंकड़ा है। प्रशासन ने इस भयावह स्थिति पर चिंता जताई है।
साल-दर-साल बढ़ा मौत का ग्राफ
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो किसान आत्महत्या की स्थिति बेहद गंभीर है। मराठवाड़ा में 2021 से लेकर अब तक कुल 5,075 आत्महत्याएं दर्ज की गई हैं। साल 2021 में यह आंकड़ा 887 था। इसके बाद 2022 में यह बढ़कर 1,023 हो गया। साल 2023 में 1,088 किसानों ने मौत को गले लगाया। हालांकि, 2024 में थोड़ी राहत मिली थी और संख्या 948 रही। लेकिन 2025 में स्थिति बेकाबू हो गई और रिकॉर्ड 1,129 मौतें दर्ज की गईं।
बीड जिले में हालात सबसे बदतर
मराठवाड़ा मंडल के आठ जिलों में बीड जिले की स्थिति सबसे खराब है। पिछले साल बीड में सबसे अधिक 256 किसानों ने आत्महत्या की। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर का नंबर आता है, जहां 224 मामले सामने आए। नांदेड़ में 170 और धाराशिव में 141 किसानों ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। परभणी में 104, जालना में 90 और लातूर में 76 आत्महत्याएं दर्ज हुईं। हिंगोली में यह संख्या 68 रही। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों में से 193 को अनुग्रह राशि प्रदान की है।
कुदरत की मार ने तोड़ी कमर
अधिकारियों ने इन आत्महत्याओं के पीछे बेमौसम बारिश और बाढ़ को बड़ी वजह बताया है। पिछले साल मई महीने में मराठवाड़ा के कई इलाकों में बेमौसम बरसात हुई थी। इसके बाद सितंबर और अक्टूबर 2025 में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। रिपोर्ट के मुताबिक, कई जिलों में सामान्य से 125 से 150 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। खड़ी फसलें बर्बाद होने के कारण किसान गहरे आर्थिक संकट में फंस गए थे।
