मशोबरा में जेई की गलती से दलितों को नही मिल रहा पानी, भीम आर्मी ने दी आंदोलन की चेतावनी

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मशोबरा के समीपवर्ती गांवों धार, चैवण और पंजोग में जलशक्ति विभाग द्वारा पानी के असमान वितरण से विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के दायरे में आ गयी है। यहां पर सरकारी विलवाॅल और निजी अवैध विलवाॅल लगाने वाले दो परिवारों को 14 से 16 घंटे की सप्लाई दी जाती है, जबकि 8 घंटे 2 गांवों की अन्य समस्त जनता को दे दिए। इस असमान वितरण से एक गरीब दलित धनिया राम के परिवार को पिछले 10 दिनों से पानी नहीं आया। विभाग से शिकायत करने पर उसे बताया गया कि 21 नलकों में प्रति व्यक्ति 1 घंटा औसत समय है, ऐसे में विभाग उसे पानी मुहैया नहीं करवा पा रहा। क्योंकि पानी के वितरण के विभाग के पास कोई कर्मचारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जिन दो परिवारों के पास ग्रामीणों को पानी वितरित करने की जिम्मेदारी है। वह 16 घंटे सरकारी सप्लाई के साथ ही आईपीएच विभाग के टैंक से एवं उसके समीप से 24 घंटे की पानी की सप्लाई भी ले रहे हैं। पानी के लाभार्थी होते हुए उनको अन्य ग्रामीणों को पानी के वितरण का काम विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवालिया निशान खड़े करता है। धनियाराम का परिवार पानी कमी के कारण भारी दिक्कत का सामना कर रहा है।

जेई की मिलीभगत से प्रभावशाली व्यक्तियों को लाभान्वित कर रहा विभाग
हैरत की बात तो यह है कि जिस व्यक्ति ने सरकारी विलवाॅल लगाकर गांव चैवण की सप्लाई रोकी है, उसी व्यक्ति द्वारा प्रदत जाली दस्तावेज को प्रमाण बनाकर विभाग लोगों को मूर्ख बना रहा है। जाली दस्तावेज बनाने वाले धारवासी मनोहर लाल ने लोगों को यह कहकर लिखित दस्तखत करवा लिए वह उनके लिए पुख्ता पानी का प्रबंध करेगा। अब उक्त दस्तावेज को आधार बनाकर विभाग दावा करता है कि 21 नलकों में पानी की सप्लाई करनी होती है जबकि शिलड़ू से आने वाली लाईन में 12 से कम नलके हैं। उसने अपने 16 घंटे की सप्लाई को अबाध रखने के लिए दूसरी स्कीम से पानी की सुविधा प्राप्त करने वाले लोगों को जिक्र कर डाला ताकि ग्रामीणों के पानी के घंटे कम किए जा सके।

स्टोरेज टैंक न होने से मूल स्रोत से ही हो जाती है बंदरबांट शुरु
शिलड़ू नाला से 3 गांवों तक आने वाली सप्लाई के मूल में ही बंदरबांट शुरू हो जाती है। यहां पर स्टोरेज टैंक नही है। विभाग की ओर से केवल मात्र एक हौदी बना रखी है, जिससे दोनों ओर से पानी में लोगों ने अवैध पानी की पाईपें लगा रखी है। अवैध निजी पाईपों से कुछ लोग फसलों की सिंचाई करते है, जबकि बाकी आम जनता के भोजन बनाने तक के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। इस बारे में लिखित शिकायत जिलाधीश शिमला को की गयी थी। जिसमें पंचायत और आईपीएच विभाग को उचित कार्यवाही करने के लिए निर्देष प्रदान किये गये थे। लेकिन 3 साल बीतने के बाद भी विभाग और पंचायत के पास नयी-नयी स्कीमों के दावे तो है पर कोई समाधान नहीं हुआ।

भीम आर्मी ने दी आंदोलन की चेतावनी होगा
भीम आर्मी के प्रदेषाध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता रवि दलित ने दलित परिवार की दुर्दशा पर दुख प्रकट किया है। उसका कहना है कि विभाग की लापरवाही से दलित परिवार को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उसके घर पर पानी की भारी किल्लत है। ऐसे में अगर जलशक्ति विभाग के गरीब दलित परिवार के साथ न्याय नहीं किया तो इसके विरूद्ध आंदोलन किया जायेगा जिसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।


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