उपराष्ट्रपति चुनाव आज, किसका पलड़ा है भारी और किस तरह होता है चुनाव

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RIGHT NEWS INDIA: आज यानी छह अगस्त 2002 को भारत के 16वें उपराष्ट्रपति के लिए मतदान हो रहा है. वर्तमान उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को पूरा हो रहा है. देश का संविधान भारत के उपराष्ट्रपति को दोहरी भूमिका सौंपता है.

पहली भूमिका ये है कि वो कार्यपालिका के दूसरे मुखिया होते हैं और दूसरी भूमिका ये कि वो संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के सभापति होते हैं. इस बार एनडीए ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है.

वहीं विपक्ष ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. हालांकि, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ का समर्थन करने का ऐलान किया है.

जगदीप धनखड़ के बारे में बड़ी बातें

  • जगदीप धनखड़ का जन्म राजस्थान ज़िले के झुंझुनू ज़िले के किठाना गांव में 18 मई, 1951 में हुआ था
  • धनखड़ की शुरुआती पढ़ाई (कक्षा एक से पांच तक) गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई
  • इसके बाद उन्होंने स्कॉलरशिप हासिल करके चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में दाख़िला लिया
  • धनखड़ ने जयपुर के प्रतिष्ठित महाराजा कॉलेज से बीएससी (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की
  • उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से ही क़ानून (एलएलबी) की पढ़ाई की. पढ़ाई में वे हमेशा अव्वल रहे ।

मार्गरेट अल्वा के बारे में बड़ी बातें

  • मार्गरेट अल्वा का जन्म 1942 में मैंगलोर में हुआ था. इसके बाद ही मद्रास प्रेसिडेंसी की अलग-अलग जगहों पर पली-बढ़ीं. उनके पिता इंडियन सिविल सर्विस में थे
  • उनकी शादी अल्वा परिवार में हुई थी. उनके सास-ससुर दोनों सांसद थे. इस परिवार में ही उन्होंने राजनीति के गुर सीखे
  • थे. मार्गरेट अल्वा 42 साल की उम्र में ही मंत्री बन गई थीं, जो उन दिनों एक बड़ी उपलब्धि थी
  • अल्वा गुजरात, गोवा, राजस्थान और उत्तराखंड की राज्यपाल भी रह चुकी हैं
  • अल्वा चार बार राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं. 1974 से 1992 के बीच वे चार बार ऊपरी सदन की सदस्य रहीं
  • साल 1991 में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में उन्हें कार्मिक मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद मिला था. लोकसभा के लिए वह पहली बार 1999 में कर्नाटक की कनारा सीट से चुनी गई थीं

भारत के उपराष्ट्रपति की ज़िम्मेदारियां क्या हैं?

उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति भी होता है. संविधान में उपराष्ट्रपति को मुख्य ज़िम्मेदारी यही दी गई है. इसके अलावा भी कुछ भूमिकाएं हैं जिनका निर्वहन उपराष्ट्रपति को करना होता है. अगर राष्ट्रपति का पद किसी वजह से ख़ाली हो जाए तो यह ज़िम्मेदारी उपराष्ट्रपति को ही निभानी पड़ती है क्योंकि राष्ट्र प्रमुख के पद को ख़ाली नहीं रखा जा सकता.

पदक्रम के आधार पर देखें तो उपराष्ट्रपति का पद राष्ट्रपति से नीचे और प्रधानमंत्री से ऊपर होता है. उपराष्ट्रपति विदेश दौरों पर भी जाते हैं ताकि अन्य देशों के साथ कूटनीतिक रिश्ते मज़बूत किए जा सकें.

उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया क्या है?

उपराष्ट्रपति का चुनाव परोक्ष होता है, जिसके निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज में राज्यसभा और लोकसभा के सांसद शामिल होते हैं. राष्ट्रपति चुनाव में चुने हुए सांसदों के साथ विधायक भी मतदान करते हैं लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते है. ख़ास बात यह है कि दोनों सदनों के लिए मनोनीत सांसद राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर सकते लेकिन वे उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग कर सकते हैं.

उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा हो जाने के 60 दिनों के अंदर चुनाव कराना ज़रूरी होता है. इसके लिए चुनाव आयोग एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करता है जो मुख्यत: किसी एक सदन का महासचिव होता है.

निर्वाचन अधिकारी चुनाव को लेकर पब्लिक नोट जारी करता है और उम्मीदवारों से नामांकन मंगवाता है. उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार के पास 20 प्रस्तावक और कम से कम 20 अन्य अनुमोदक होने चाहिए.

प्रस्तावक और अनुमोदक राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य ही हो सकते है. उम्मीदवार को 15000 रुपए भी जमा कराने होते हैं. इसके बाद निर्वाचन अधिकारी नामांकन पत्रों की जांच करता है और योग्य उम्मीदवारों के नाम बैलट में शामिल किए जाते हैं.संसद

भारत का उपराष्ट्रपति बनने के लिए योग्यता चाहिए?

उपराष्ट्रपति लोकसभा, राज्यसभा या किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होता है. अगर संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन का कोई सदस्य उपराष्ट्रपति के तौर पर निर्वाचित हो जाता है, तो ये समझा जाता है कि उसने उस सदन में अपना स्थान उपराष्ट्रपति के रूप में अपने पद ग्रहण की तारीख से खाली कर दिया है. कोई व्यक्ति भारत का उपराष्ट्रपति चुने जाने के लिए तभी योग्य होगा जब वह कुछ शर्तों को पूरा करता हो. जैसे, वह भारत का नागरिक होना चाहिए, उम्र 35 साल से कम नहीं होनी चाहिए और वह राज्यसभा के लिए चुने जाने की योग्यताओं को पूरा करता हो.

अगर कोई भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन कोई लाभ का पद रखता है तो वह उपराष्ट्रपति चुने जाने के योग्य नहीं होगा. अगर संसद के किसी सदन या राज्य विधानमंडल का कोई सदस्य उपराष्ट्रपति चुन लिया जाता है तो यह समझा जाता है कि उन्होंने उपराष्ट्रपति का पद ग्रहण करते ही अपना पिछला स्थान ख़ाली कर दिया है.

उपराष्ट्रपति कैसे चुने जाते हैं?

उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव इलेक्शन अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति से किया जाता है. इसमें वोटिंग खास तरीके से होती है जिसे सिंगल ट्रांसफ़रेबल वोट सिस्टम कहते हैं.

इसमें मतदाता को वोट तो एक ही देना होता है मगर उसे अपनी पसंद के आधार पर प्राथमिकता तय करनी होती है. वह बैलट पेपर पर मौजूद उम्मीदवारों में अपनी पहली पसंद को 1, दूसरी पसंद को 2 और इसी तरह से आगे की प्राथमिकता देता है.

उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटों की गिनती कैसे होती है?

सबसे पहले यह देखा जाता है कि सभी उम्मीदवारों को पहली प्राथमिकता वाले कितने वोट मिले हैं. फिर सभी को मिले पहली प्राथमिकता वाले वोटों को जोड़ा जाता है. कुल संख्या को 2 से भाग किया जाता है और भागफल में एक जोड़ दिया जाता है. अब जो संख्या मिलती है उसे वह कोटा माना जाता है जो किसी उम्मीदवार को काउंटिंग में बने रहने के लिए ज़रूरी है.

अगर पहली गिनती में ही कोई कैंडिडेट जीत के लिए ज़रूरी कोटे के बराबर या इससे ज़्यादा वोट हासिल कर लेता है तो उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है. अगर ऐसा न हो पाए तो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है. सबसे पहले उस उम्मीदवार को चुनाव की रेस से बाहर किया जाता है जिसे पहली गिनती में सबसे कम वोट मिले हों.

लेकिन उसे पहली प्राथमिकता देने वाले वोटों में यह देखा जाता है कि दूसरी प्राथमिकता किसे दी गई है. फिर दूसरी प्राथमिकता वाले ये वोट अन्य उम्मीदवारों के ख़ाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं. इन वोटों के मिल जाने से अगर किसी उम्मीदवार के मत कोटे वाली संख्या के बराबर या ज़्यादा हो जाएं तो उस उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया जाता है.

अगर दूसरे राउंड के अंत में भी कोई कैंडिडेट न चुना जाए तो प्रक्रिया जारी रहती है. सबसे कम वोट पाने वाले कैंडिडेट को बाहर कर दिया जाता है. उसे पहली प्राथमिकता देने वाले बैलट पेपर्स और उसे दूसरी काउंटिंग के दौरान मिले बैलट पेपर्स की फिर से जांच की जाती है और देखा जाता है कि उनमें अगली प्राथमिकता किसे दी गई है.

फिर उस प्राथमिकता को संबंधित उम्मीदवारों को ट्रांसफ़र किया जाता है. यह प्रक्रिया जारी रहती है और सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों को तब तक बाहर किया जाता रहेगा जब तक किसी एक उम्मीदवार को मिलने वाले वोटों की संख्या कोटे के बराबर न हो जाए.

इलेक्शन हो जाने के बाद वोटों की गिनती होती है और निर्वाचन अधिकारी नतीजे का ऐलान करता है. इसके बाद रिज़ल्ट को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय के पास भेजा जाता है. इसके बाद केंद्र सरकार अपने आधिकारिक गैजट पर चुने हुए व्यक्ति का नाम प्रकाशित करती है.

पद ग्रहण करने से पहले उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति के सामने या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त व्यक्ति के सामने शपथ लेनी होती है. उपराष्ट्रपति अपने पद से इस्तीफा देना चाहे तो उसे राष्ट्रपति के पास अपना त्यागपत्र भेजना होता है. राष्ट्रपति के स्वीकार किए जाने के बाद ही इस्तीफ़ा प्रभावी होता है.1. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन

भारत में अभी तक कितने उपराष्ट्रपति रहे हैं?

एम. वेंकैया नायडु से पहले 12 उपराष्ट्रपति रहे हैं. अब तक के भारत के उप राष्ट्रपति और उनका कार्यकाल इस प्रकार है:

  1. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (मई 13, 1952 से मई 12, 1962)
  2. डॉ जाकिर हुसैन (मई 13, 1962 से मई 12, 1967)
  3. वी.वी. गिरि (मई 13, 1967 से मई 3, 1969)
  4. गोपाल स्वरूप पाठक (अगस्त 31, 1969 से अगस्त 30, 1974)
  5. बी डी ज़त्ति (अगस्त 31, 1974 से अगस्त 30, 1979)
  6. एम हिदायतुल्ला (अगस्त 31, 1979 से अगस्त 30, 1984)
  1. आर वेंकटरमन (अगस्त 31, 1984 से जुलाई 24, 1987)
  2. डॉ शंकर दयाल शर्मा (सितम्बर 3, 1987 से जुलाई 24, 1992)
  3. के.आर. नारायणन (अगस्त 21, 1992 से जुलाई 24, 1997)
  4. श्री कृष्णकांत (अगस्त 21, 1997 से जुलाई 27, 2002)
  5. भैरों सिंह शेखावत (अगस्त 19, 2002 से जुलाई 21, 2007)
  6. मो. हामिद अंसारी (अगस्त 11, 2007 से अगस्त 10, 2017)

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