भूमि अधिग्रहण पर चार गुना मुआवजा देने में आनाकानी करने पर जयराम सरकार के खिलाफ होगा संघर्ष तेज: प्रभावित मंच

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आज भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच की गूगल मीट के माध्यम से बैठक बी आर कोंडल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमे शिमला, सोलन, बिलासपुर, मंडी, काँगड़ा व कुल्लू के 27 संगठनों के 45 कमेटी सदस्यों ने भाग लिया। मंच के अध्यक्ष बी आर कोंडल ने कहा कि सरकार 14 दिसम्बर को धर्मशाला में आयोजित रैली के उपरांत और विधानसभा के अन्दर राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर से अपनी मांगों को लेकर मिला था। जिसमे भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 को लागु करवाने व चार गुना मुआवजा, पुनर्वास व पुनर्स्थापना के मुद्दे पर सरकार ने 15 दिनों के अन्दर फैसला लेने की बात की गई थी। लेकिन बड़ी हैरानी की बात है कि 4.5 महीने के उपरांत अब तक कोई उचित फैसला नहीं ले पाई है, जिसके कारण किसानो में इस सरकार के खिलाफ भारी गुस्सा है।

सयोंजक जोगिन्दर वालिया ने कहा है कि पिछले 4.5 साल से फोरलेन संघर्ष समिति व भूमि अधिग्रहण मंच अपनी आवाज़ उठाता रहा है। जयराम सरकार कई बार कमेटियो की बैठक के बाद हमेशा यही कहती आई है कि वो फोरलेन से प्रभावितों किसानों के बारे में चिंतित एवं संवेदनशील है। लेकिन चार गुणा मुआवजे के बारे आनाकानी व टालमटोल की नीति लगातार अपना रही है और किसानो की मांग को हल नहीं करना चाहती। बड़े दुःख की बात है कि 17 जुलाई को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 3 सदस्य मंत्रीमंडल कमेटी की बैठक शिमला में की गई। जिसमे चार गुणा मुआवजा़ देने में सहमति नहीं बन पाई। कमेटी अब बहाना ढूंढ रही है कि चार गुणा मुआवजे की अदायगी के लिए केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पूछना होगा। प्रभावित परिवारों की दोबारा पहचान की जाएगी। जो सरासर प्रभावित किसानों के साथ मजाक किया जा रहा है। जबकि गडकरी पहले ही कुल्लू में आकर कह गए है कि यदि सरकार हिमाचल प्रदेश चार गुणा मुआवजा लोगों को देना चाहती है तो केन्द्रीय सरकार को उस में कोई एतराज़ नहीं है। दूसरी तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात में कह चुके है कि प्रभावित किसानो को चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। जिसको पूरी तरह से हिमाचल सरकार नजरअंदाज कर रही है और हिमाचल सरकार आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए टालमटोल की नीति व किसानों में भ्रमित बयान जारी कर के लोगों को गुमराह कर रही है।

मंच के सह सयोंजक, नरेश कुकू ने जयराम ठाकुर से सवाल करते हुए पूछा है कि भाजपा ने 2017 में चुनावी वायदा (दृष्टी पत्र) किया था कि अगर हमारी सरकार बनेगी तो हम दो फैक्टर अर्थात चार गुणा मुआवजा प्रभावित किसानों को देंगे। उलटे फोरलेन साथ 50 मीटर टीसीपी की योजना को लागु कर दिया गया। टोल प्लाजा में स्थानीय लोगो कोई राहत न देने, जमीन का मार्केट रेट के अनुसार बयान सहित मुआवजा न देना, मंडलीय न्यायलय में लंबित जमीन अधिग्रहण की सुनवाई न होने के कारण जयराम सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है, जिस का खामियाजा़ आने वाले चुनाव में भूगतना पड़ेगा।

अंत में प्रभावित किसानों के सभी संगठनों ने फैसला लिया कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 (चार गुना मुआवजा, पुनर्वास व पुनर्स्थापना) को हिमाचल में लागु करवाने हेतु आने वाले दिनों में सरकार के खिलाफ 18 अगस्त को मंडी-बजौरा के किसानो का बालीचोकी में और 22 अगस्त को मंडी में नारला से बिजनी प्रभावित किसानो के साथ सहयोग/ प्रदर्शन किया जायेगा। उसके उपरांत सितम्बर माह में उपमंडलीय/जिला/राज्य स्तरीय धरना प्रदर्शन/रैली का आयोजन किया जाएगा और आने वाले दिनों में संघर्ष को तेज किया जाएगा।

अध्यक्ष बेलीराम कोंडल, सयोंजक जोगिन्दर वालिया के अलावा कुल्लू-मंडी से नरेश कुकू, बंसीलाल ठाकुर, काँगड़ा से राजेश पठानिया, करण राणा, शिमला से जय शिव, संजीव, मंडी से प्रशांत मोहन, वीरेंद्र ठाकुर, फ़रमान, हरीराम, राजकुमार वर्मा, विजय ठाकुर, बिलासपुर से मदन शर्मा, सोलन से जे सी शर्मा, चरणदास, नवीन मेहता बद्दी से सुखविंदर सैनी, गुरदियाल आदि ने हिस्सा लिया

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