इस गांव में आजादी के 75 साल बाद भी नही पहुंची सड़क, पालकी में उठा कर हॉस्पिटल ले जाने पड़ते है मरीज

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सलूणी: प्रदेश सरकार विकास के दावे पर मिशन रिपीट की बात करती है। सरकार के इस दावे में कितनी सच्चाई है, इसका प्रमाण डल्हौजी विधानसभा के गांव खनेई में देखने को मिलता है।

आजादी के 7 दशक बाद भी सलूणी उपमंडल की भांदल पंचायत का गांव खनेई सड़क सुविधा से जुड़ नहीं पाया है। आज भी गांव में बीमार होने पर व्यक्ति को पालकी के माध्यम से 2 किलोमीटर सड़क तक ले जाना पड़ता है। उसके बाद गाड़ी के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया जाता है तब जाकर स्वास्थ्य सेवाएं नसीब होती हैं।

घायल युवती को पालकी में पहुंचाना पड़ा घर
गांव की एक युवती जोकि चम्बा मेडिकल काॅलेज में नर्सिंग की ट्रेनिंग ले रही है, वहां पर उसका अचानक उसका पांव फिसल गया और पीठ की हड्डी फ्रैक्चर हो गई। युवती के पिता सुरिंदर कुमार उसे उपचार के लिए मेडिकल काॅलेज टांडा (कांगड़ा) ले गए। अस्पताल से छुट्टी होने के बाद वह अपनी बेटी को गाड़ी के माध्यम से स्नूह (भांदल) तक लाए और उसके आगे गांववासियों का सहारा लेकर पालकी के माध्यम से बेटी को घर पहुंचाया। जब ग्रामीण युवती को पालकी के माध्यम से ले जा रहे थे तो सरकार को काफी कोसते देखे गए। उनका कहना था कि आखिरकार सरकार उनके गांव को कब सड़क से जोड़ेगी।

समस्या हल नहीं हुई तो चुनावों का होगा बहिष्कार
वार्ड सदस्य प्रदीप कुमार अनूप कुमार, जगदीश चंद, प्रेम सिंह, नरेंद्र कुमार, गोन,ओम प्रकाश, वीरेंद्र कुमार, रत्न चंद, योग राज, सुरिंदर कुमार व जीवन का कहना है कि सड़क सुविधा न होने के चलते कई बार मरीज अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को रोजमर्रा की वस्तुओं को भी पीठ पर उठाकर गंतव्य तक पहुंचानी पड़ती हैं। सड़क की समस्या बारे कई बार सरकार को अवगत करवाया गया लेकिन आजतक उनकी समस्या का निदान नहीं हुआ। हालांकि 5 वर्ष पूर्व विभाग ने गांव को सड़क से जोड़ने के लिए सर्वे करवाया था जाेकि सर्वे तक ही सीमित रह गया। ग्रामीणों ने सरकार को दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी समस्या का निदान नहीं किया तो आने वाले विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करेंगे।


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