Nag Panchami: इस मंदिर में विराजते है साक्षात नाग देवता, मिट्टी को फेंकने से घर में नही आते सांप

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Himachal Pradesh Famous Nag Mandir: हिमाचल प्रदेश देव भूमि है और देव भूमि होने के कारण यहां कण कण में भगवान का वास है। हरेक जगह में कोई न कोई देवी देवता है और उससे जुड़ी रोचक कथाएं हैं।

सावन के महीने कई मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है और मेले लगते हैं। इन्हीं में से एक है रानीताल के चेलिया स्थित जमुआला नाग जो साक्षात शेष नाग हैं। यहां सावन के महीने में मेले लगते हैं और श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक रहती है। इन्हीं दिनों श्रद्धालुओं को साक्षात नाग देवता के दिव्य दर्शन भी होते हैं।

धर्मशाला होशियारपुर मार्ग पर देहरा में जमुआला नाग मंदिर स्थित है, जिसे शेष नाग भी कहा जाता है। यह हाईवे से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुख्य द्वार से मंदिर की दूरी चार सौ मीटर है। मंदिर तक ही वाहन पहुंचता है, लेकिन मेले व नाग पंचमी में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण गाड़ियां पार्किंग में खड़ी होती हैं। कांगड़ा से मंदिर की दूरी करीब 16 किलोमीटर है। बताया जाता है एक जम्‍वाल परिवार जम्मू से आकर यहां बस गया था। यह नाग देवता जमुआल परिवार के कुल देवता हैं। मान्‍यता है कि क्षेत्र में अगर किसी को सांप काट ले तो मंदिर के दरबार लाने व मिट्टी का लेप लगाने से उसे जहर का असर नहीं रहता।

यह है मान्यता

देहरा के रानीताल में दो महीने चलने वाले सावन माह मेले शुरू हो गए हैं। यहां प्रत्यक्ष रूप में भक्तों को नाग देवता दर्शन भी देते हैं। यहां की मान्यता है कि जिस किसी को भी सांप, बिच्छू काट ले तो मात्र तीन बार परिक्रमा कर काटे गए स्थान पर धागा बांधकर और यहां की चमत्कारी मिट्टी का लेप लगाने से व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है। भक्त यहां की चमत्कारी मिट्टी अपने साथ घर भी ले जाते हैं। मान्यता यह भी है कि इस चमत्कारी मिट्टी को अगर भक्त अपने घर के आसपास पानी में घोल कर छिड़कें तो जहरीले सांप, बिच्छू घर में नहीं घुसते। जिससे सांप-बिच्छू आदि के काटने का भय भी नहीं रहता।

सल का कुछ हिस्सा मंदिर में अर्पित करते हैं किसान

इस मंदिर में नमक व आटा चढ़ाया जाता है। किसान यहां अपनी फसल का कुछ अंश जिसे औरा कहते हैं, यहां अर्पित करते हैं। यहां चढ़ने वाली सामग्री का रोट बनाकर चढा़या जाता है। मंदिर व नाग देवता को लेकर यहां के लोगों में अथाह श्रद्धा है। किसान परिवार नाग देवता की विशेष पूजा अर्चना करते हैं।

सावन में चलते हैं दो माह मेले

पुजारी रविंद्र जमुआल ने बताया श्री नाग देवता के चमत्कार से यहां सांप, बिच्छू के काटे का इलाज होता है। श्री नाग देवता की पूजा के बाद दिए जाने वाले प्रसाद में चमत्कारी मिट्टी के लेप से और चमत्कारी धागा बांधने से जहरीले विष से निजात मिल जाती है। सावन में दो माह मेले चलते हैं।

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