मार्गरेट अल्वा उपराष्ट्रपति चुनाव में हारी, 15 अमान्य वोट पड़े, 40 सांसदों ने नही किया मतदान

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विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को उपराष्ट्रपति चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है. धनखड़ को 528 वोट मिले, जबकि अल्वा को 182 वोट मिले. वहीं, 15 वोट अमान्य रहे.

विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को उपराष्ट्रपति चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है. एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने उन्हें भारी मतों से हराया है. धनखड़ को 528 वोट मिले, जबकि अल्वा को 182 वोट प्राप्त हुए. वहीं, 15 वोटों को रद्द कर दिया गया. अल्वा की हार की एक सबसे बड़ी वजह ये भी माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में कई विपक्षी सांसदों ने मतदान नहीं किया. वे वोटिंग से दूरी बनाए रहे. तृणमूल कांग्रेस ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान से दूर रहेगी. बता दें कि टीएमसी के दोनों सदनों को मिलाकर कुल 39 सांसद हैं.

ममता बनर्जी के 34 सांसदों ने उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग नहीं की. टीएमसी के केवल दो सांसदों ने वोट डाले. सुवेंदु अधिकारी के पिता शिशिर और भाई दुब्येंदु अधिकारी ने पार्टी का फैसला नहीं माना. उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग बायकॉट की घोषणा के बावजूद भी उन्होंने वोटिंग की. इसके अलावा समाजवादी पार्टी के और शिवसेना के दो-दो सांसदों ने वोटिंग नहीं की. वहीं, बीएसपी के एक सांसद ने मतदान नहीं किया. बताया जा रहा है कि करीब 40 सासंदों ने उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं किया.

बता दें कि उपराष्ट्रपति चुनाव में 780 सांसदों में से 725 ने मतदान किया. धानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत लगभग 93 फीसदी सांसदों ने मतदान किया, जबकि 50 से अधिक सांसदों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं किया. संसद के दोनों सदनों को मिलाकर कुल सदस्यों की संख्या 788 होती है, जिनमें से उच्च सदन की आठ सीट फिलहाल रिक्त हैं. ऐसे में उपराष्ट्रपति चुनाव में 780 सांसद वोट डालने के लिए पात्र थे.

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