भाजपा की दलित विरोधी नीतियों से आहत होकर दलित नेता ने दिया इस्तीफा, पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप ने जोड़ा था पार्टी से

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हिमाचल के पौंटा साहिब विधानसभा क्षेत्र में भाजपा सरकार की दलित विरोधी नीतियों के विरोध के स्वर मुखर हुए है। जानकारी के मुताबिक हिमाचल भाजपा की नीतियों से परेशान होकर दलित नेता अमित कुमार ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाए है कि भाजपा के राज में दलितों के इलाकों में विकास कार्य नही हुए। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी सरकार के समय दलित विरोधी संगठनों के द्वारा कई असंवैधानिक कार्य करने के बाबजूद उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की तथा स्वर्ण आयोग जैसी नीतियों को बढ़ावा दिया।

अमित कुमार ने अपने त्याग पत्र में गिरिपार क्षेत्र के सभी लोगों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, गिरिपार के सभी लोगों को अनुसूचित जाति में शामिल करने से दलितों पर अत्याचार बढ़ेंगे और भाजपा सरकार ने इस बारे दलितों की कोई बात नही सुन रही।

जाने क्या लिखा त्याग पत्र में

भाजपा की सदस्यता से त्याग पत्र

आदरणीय मंडल अध्यक्ष भाजपा

मैं अमीत कुमार निवासी वार्ड नम्बर 7 पांवटा साहिब ने सन: 2008 में प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप जी की अध्यक्षता में निर्स्वाथ भाव से भाजपा पार्टी भाजपा सदस्यता ग्रहण की थी।

जब भी पार्टी को मेरी जरूरत पड़ी में हमेशा पार्टी के साथ निस्वार्थ जुड़ा रहा समय-समय पर प्रचार-प्रसार भी किया, लेकिन जब भी मुझे पार्टी से जनहित का कोई काम पड़ा पार्टी हमारा काम करने में असमर्थ रही अब हम पार्टी में रहना उचीत नही समझते, पार्टी में विशेष कार्यकर्ताओं के काम किए जाते हैं जिसके कारण मैं काफी आहत हुआ हूं।

परन्तु पार्टी की कुछ जन विरोधी नीतियों के चलते मुझे भाजपा से अपना त्याग पत्र देना पड़ रहा हैं।

जन विरोधी नीति निम्नलिखित हैं:
1) वार्ड 5 ओर 7 वाल्मीकि बस्ती के बीच में गंदे नाले को 6 महीने में ढ़कने का आश्वासन साढ़े 4 वर्षों बाद भी पूरा नहीं।
2) दलित विरोधी संगठनों का समर्थन करना और उन्हें बढ़ावा देना जैसे स्वर्ण आयोग।
3) दलित समुदाय को नीचा समझ कर कोई सम्मान नहीं देना।
4) शिलाई में जनजातीय क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद दलित समुदाय पर अत्याचार और बढ़ेगा। इस विषय पर हमारी आवाज का नहीं उठाना।
5) सफ़ाई कर्मचारियों के लिए कोई पॉलसी ना बनाना।

अत: श्री मान मंडल अध्यक्ष जी भाजपा की इन्ही दलित विरोधी नीतियों से परेशान होकर अब में भाजपा से अपना त्याग पत्र दे रहा हूं
अतः आपसे निवेदन है आप मुझे भाजपा सदस्यता से मुक्त करें ।
धन्यवाद।

भाजपा का होगा नुकसान

आपको बता दे अमित कुमार पिछले कई वर्षों से दलितों की आवाज उठा रहे है सक्रिय रूप से सामाजिक कार्यकर्ता है। वह हमेशा दलितों की हित में आवाज उठाने के लिए आगे आते रहे है। वह सफ़ाई कर्मचारियों और दलितों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ हमेशा संघर्ष करते रहते है। उन्होंने प्रदेश भर में कई दलित आंदोलनों का नेतृत्व भी किया है। आपको बता दें कि पौंटा साहिब विधानसभा में लगभग 15000 से 20000 दलित वोट है और अमित कुमार के इस्तीफा देने से तय है कि यह वोट भाजपा के विरोध में पड़ेंगे। अमित कुमार का इस्तीफा देना भाजपा को आगामी चुनावों में भारी नुकसान पहुंचाएगा।

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