हिमाचल हाई कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस, जाने क्या है कारण

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शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट (Himachal High Court) ने नगर निगम शिमला की मतदाता सूची में बाहरी विधानसभा के वोटरों को रोकने वाले प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका में राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को नोटिस (Notice) जारी किया।

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने कुणाल वर्मा की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात सरकार को 22 अगस्त तक याचिका का जवाब दायर करने के आदेश दिए। याचिका के अनुसार शहरी विकास विभाग द्वारा 9 मार्च, 2022 को जारी अधिसूचना के लागू होने से शिमला नगर निगम के 20000 से अधिक मतदाता प्रभावित होंगे और उन्हें मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।

नगर निगम शिमला का नगर क्षेत्र राज्य विधान सभा क्षेत्रों के तीन खंडों अर्थात शिमला शहरी, कसुम्प्टी, शिमला ग्रामीण तक फैला हुआ है। एमसी, शिमला (Shimla) का वर्तमान कार्यकाल 18 जून को समाप्त हो गया था। प्रार्थी का कहना है कि उसका इरादा एमसी, शिमला की मतदाता सूची में मतदाता के रूप में पंजीकृत होना था परंतु सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के आधार पर उसे एमसी, शिमला की मतदाता सूची में मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है। प्रार्थी का आरोप है कि ऐसा पहली बार किया गया है।

इस प्रावधान के अनुसार यदि कोई मतदाता उस विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता के रूप में पंजीकृत है, जो एमसी, शिमला हिस्सा नहीं है, तो उसे एमसी में निर्वाचक के रूप में अयोग्य घोषित किया जाएगा। यह अधिसूचना जारी करके सरकार ने हिमाचल प्रदेश नगर निगम चुनाव नियम, 2012 के नियम 14, 16 और 26 में संशोधन किया है, जिससे अन्य विधायी निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचकों को नगर निगम के मतदाता होने से रोक दिया गया है जो एमसी क्षेत्र का हिस्सा नही है। यह अधिसूचना उस नागरिक के नगर निगम क्षेत्र में वोट देने के संवैधानिक और वैधानिक अधिकार को खत्म करती है जो नगर निगम का सामान्य निवासी होने के साथ साथ किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र का मतदाता भी है। प्रार्थी का आरोप है कि विवादित अधिसूचना जारी करने की पूरी प्रक्रिया अपारदर्शी ढंग से की गई है और संबंधित मतदाता की आपत्तियां भी आमंत्रित नहीं की गई है।

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