5 अगस्त को शिमला में गर्जेंगे हिमाचल के बागवान, कहा, बहुत महंगे मिल रहे कार्टन

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किन्नौर जिला अपने सेब बागवानी के लिए विश्वभर में मशहूर है, यहां के सेब की लाली सेब की मंडी मे अपना रंग गहराई से बिखेरने क़ा काम करती है, परन्तु अब किन्नौर जिला में सेब के काटन बहुत महंगे दामों में बागवानों को मिल रहे है। ऐसे में महंगाई के चलते सेब की लाली फीकी पड़ने लगी है, यह बात प्रदेश कांग्रेस के सचिव सत्यजीत नेगी ने रिकांगपीओ में एक प्रेसवार्ता के दौरान जानकारी दी है।

सत्यजीत नेगी ने जानकारी देते हुए कहा कि किन्नौर जिला में लोगों की आय क़ा मुख्य साधन सेब है। जिससे जिला के लोगों की वर्षभर के आर्थिकी व घरेलू खर्चे चलते है। ऐसे में इस वर्ष सेब के काटन (पेटी) के दाम बढ़ने से सेब बागवानो को सीजन के शुरुआती दौर में महंगे काटन खरीदना मुश्किल साबित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार सेब के समर्थन मूल्य को बढ़ाने मे असमर्थ हुई है और जम्मू कश्मीर की तर्ज पर समर्थन मूल्य नहीं दिया जा रहा है, वहीं सरकार सेब बागवानो को महंगाई से निजात दिलाने के बजाय इसके विपरीत काटन के दाम बढ़ा रही है।

ऐसे में सेब की पेकिंग के लिए काटन खरीदना मुश्किल साबित हो रहा है और अब सेब के दाम कम और काटन के दाम बढ़ने से बागवानो की चिंताये बढ़ गयी है। उन्होंने कहा कि आज जिला मे सेब के एक काटन का मूल्य 75 रूपये हो चूका है जो बीते 5 वर्षो के मुताबिक सबसे अधिक है, जबकि इससे पूर्व एक काटन का दाम 60 रूपये होता था…

उन्होंने कहा कि 5 अगस्त को प्रदेश स्तर पर प्रदेश के बागवान राजनीति से ऊपर उठकर सभी एकजुट होकर सेब के काटन,रासायनिक दवाई, व सेब से जुड़े विषयो पर शिमला के सचिवालय मे धरना प्रदर्शन करने जा रही है। जिसमे जिला किन्नौर से भी हजारों की संख्या मे सेब बागवान राजनीति से दूर रहकर इस प्रदेश के सचिवालय का घेराव कर धरना प्रदर्शन में भाग लेंगे।

उन्होंने कहा कि जिला किन्नौर के निचले क्षेत्रों मे सेब का सीजन शुरू हो चूका है ऐसे में सीजन शुरू होने के बाद भी बागवानो को महंगे काटन खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। लेकिन सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं दिख रही है।

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