हाई कोर्ट ने खारिज किया पुनर्विचार आवेदन, कहा, जेबीटी के पदों को एनसीटीआई की अधिसूचना के अनुसार भरा जाए

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जेबीटी भर्ती मामले में प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के पुनर्विचार आवेदन को खारिज कर दिया है। राज्य सरकार ने अदालत से आवेदन किया था कि छह मई को पारित आदेशों पर पुनर्विचार किया जाए।

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने पुनर्विचार आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि छह मई के आदेश स्पष्ट हैं। छह मई को अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि जेबीटी पदों को एनसीटीई की ओर से जारी 28 जून 2018 की अधिसूचना के अनुसार भरा जाए। अदालत ने स्पष्ट किया था कि ये भर्ती पुनर्विचार याचिका और सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी। 26 नवंबर 2021 को हाईकोर्ट ने जेबीटी भर्ती मामलों पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया था कि शिक्षकों की भर्ती के लिए एनसीटीई की ओर से निर्धारित नियम प्रारंभिक शिक्षा विभाग के साथ-साथ कर्मचारी चयन आयोग पर भी लागू होते हैं।

कोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं को स्वीकारते हुए प्रदेश सरकार को यह आदेश भी दिए थे कि वह 28 जून 2018 की एनसीटीई की अधिसूचना के अनुसार जेबीटी पदों की भर्ती के लिए नियमों में जरूरी संशोधन करे। अदालत के इस फैसले से जेबीटी पदों के लिए बीएड डिग्री धारक भी पात्र हो गए थे। बाद में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका में पारित आदेशों के अनुसार इस फैसले पर रोक लगा दी थी। इस रोक के बाद बीएड डिग्री धारक फिर से इन पदों के लिए अयोग्य हो गए है। बीएड डिग्री धारक याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि उन्हें भी जेबीटी भर्ती के लिए योग्य समझा जाए। बीएड डिग्री धारक होने के साथ-साथ उन्होंने टेट भी उत्तीर्ण किया है और एनसीटीई के नियमों के तहत जेबीटी शिक्षक बनने के लिए पात्रता रखते हैं।

एमबीयू के दस्तावेजों के सत्यापन के लिए कमेटी बनाने के आदेश
वहीं, हिमाचल हाईकोर्ट ने मानव भारती विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री मामले में राज्य सरकार को कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने कमेटी को आदेश दिए कि वह दस्तावेजों का सत्यापन करें। मानव भारती विश्वविद्यालय के छात्रों की मुश्किलों को देखते हुए अदालत ने यह आदेश दिए। विश्वविद्यालय पर फर्जी डिग्रियां जारी करने के आरोप हैं। हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक की ओर से विश्वविद्यालय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। विशेष जांच टीम इस मामले की जांच कर रही है। विश्वविद्यालय के सारे दस्तावेज विशेष जांच टीम के पास है। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय के छात्रों को प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहे हैं। छात्रों की मुश्किलों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक ने राज्य सरकार से इन दस्तावेजों की प्रतिलिपियों की मांग की थी। मामले की सुनवाई 16 अगस्त को निर्धारित की गई है।

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