पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अनुपस्थिति कांग्रेस को पहुंचा रही नुकसान; जयराम ठाकुर

0
67

शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का मानना है कि विधानसभा चुनाव का सामना करने जा रहे उनके राज्य में आम आदमी पार्टी (आप) जैसे किसी तीसरे राजनीतिक दल के लिए ‘कोई जगह नहीं’ है और कांग्रेस का जनाधार भी पहले के मुकाबले काफी सिमट चुका है.

ठाकुर ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भाजपा हर बार विधानसभा चुनाव में सरकार बदलने के हिमाचल के रिवाज को बदल देगी और लगातार दूसरी बार सत्ता में आएगी. लेकिन, साथ ही कहा कि एक रिवाज बदलने नहीं जा रहा है- अभी भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है क्योंकि लोग किसी तीसरी पार्टी को ‘कभी स्वीकार नहीं करेंगे.’

मीडिया ने पिछले हफ्ते जब ठाकुर से शिमला के ऐतिहासिक पीटरहॉफ होटल में मुलाकात की, तो उससे कुछ ही देर पहले वह नवंबर में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार करने के लिए हिमाचल भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक में शामिल हुए थे.

ठेठ वेस्टर्न-स्टाइल पोशाक और वेस्टकोट पहने हुए ठाकुर वहां तमाम पदाधिकारियों का अभिवादन स्वीकारने में व्यस्त थे, लेकिन उन्होंने आगामी चुनावों को लेकर विस्तार से बातचीत की.

हालांकि, उन्होंने प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों की गहरी आलोचना की लेकिन अपने स्वर को एकदम संयत रखा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है, साथ ही कहा कि वह ‘कठिन दौर’ से गुजर रही है. उन्होंने कहा, ‘उनका वक्त खराब चल रहा है.’ आप को लेकर उनका कहना था कि यद्यपि इस पार्टी के लिए यहां कोई मौका नहीं है लेकिन अच्छी बात है कि ‘उन्हें कोशिश करके देख लेना चाहिए.’

उन्होंने भाजपा की चुनावी तैयारियों, पिछले साल उपचुनावों में पार्टी की हार, राज्य की नौकरशाही के साथ उनके कथित टकराव और क्या पार्टी के दिग्गज नेता और दो बार के पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल की वापसी संभव है, आदि मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा की.

‘आप के पास न नेता है और न कार्यकर्ता’

इस हफ्ते की शुरुआत में आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची घोषित करने वाली पहली पार्टी बन गई. पार्टी ने यहां अपना प्रचार अभियान भी काफी जोरशोर से चला रखा है (पंजाब के सीएम भगवंत मान तीन बार राज्य का दौरा कर चुके हैं) और कई मुफ्त सुविधाओं की घोषणा भी की है.

लेकिन ठाकुर ने कहा कि इन सबसे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है. उन्होंने इस साल के शुरू में पार्टी के कई लोगों के दलबदल करने की ओर भी इशारा किया जिसकी वजह से आप को फिर संगठित होने से पहले अप्रैल में अपनी पूर्व कार्य समिति को भंग करने पर मजबूर होना पड़ा था.

उन्होंने कहा, ‘वे राज्य में पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ होने से पहले ही उनका नेतृत्व विभाजित हो गया और उनके नेता अन्य दलों में शामिल हो गए. राज्य में उनका न कोई नेता है और न ही कार्यकर्ता. अच्छी बात है कि वे कोशिश कर रहे हैं और उनके कोशिश करते रहने में कोई बुराई नहीं है. लेकिन हिमाचल ने अपने इतिहास में कभी किसी तीसरी पार्टी को स्वीकार नहीं किया है. तीसरी पार्टी के लिए कोई जगह ही नहीं है और लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं.’

‘कांग्रेस गारंटी दे रही है लेकिन उनकी खुद की कोई गारंटी नहीं’

कुछ हफ्ते पहले, हिमाचल कांग्रेस प्रमुख प्रतिभा वीरभद्र सिंह ने राज्य में सत्ता में आने पर 10 सूत्री ‘गारंटी’ का ऐलान किया था, जिसमें 300 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए 1,500 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता, पांच लाख रोजगार पैदा करना और सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करना आदि शामिल है.

इस बारे में पूछे जाने पर ठाकुर ने उपहास के अंदाज में कहा, ‘जो लोग गारंटी दे रहे हैं, उनके पास खुद अपने लिए कोई गारंटी नहीं है. वे जिन राज्यों में सत्ता में हैं, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी क्या वे 300 यूनिट मुफ्त बिजली और महिलाओं को 1500 रुपये दे रहे हैं? लोगों को इन खोखले वादों पर कोई भरोसा नहीं है. हमने अपने घोषणापत्र में जो वादे किए थे, उन्हें लागू किया है.’

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है.

गोवा में कांग्रेस के आठ विधायकों के भाजपा में शामिल होने और वरिष्ठ कांग्रेसी गुलाम नबी आजाद के पार्टी छोड़ने का हवाला देते हुए उन्होंने चुटकी ली, ‘वे भारत जोड़ो कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, लेकिन उनके नेता कांग्रेस छोड़ो में लगे हुए हैं.’ उन्होंने बताया कि पिछले माह हिमाचल में प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष पवन काजल समेत दो कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का देश में कोई भविष्य नहीं है और हिमाचल में भी उन्हें खारिज कर दिया जाएगा.’

उनके मुताबिक, इस बार चुनाव अभियान में एक और चीज कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने जा रही है, वो है पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की अनुपस्थिति, जिनका पिछले साल निधन हो गया था.

जयराम ठाकुर ने कहा, ‘कांग्रेस में नेतृत्व का नितांत अभाव है. हिमाचल में पार्टी नेतृत्व एकजुट नहीं है और उनके पास कोई चेहरा भी नहीं बचा है. वीरभद्र सिंह ही उनका चेहरा थे. कांग्रेस अब हिमाचल में ऐसी स्थिति में पहुंच गई है कि उसके पास चुनाव लड़ने के लिए कोई चेहरा तक नहीं है. लेकिन भाजपा के पास मजबूत नेतृत्व है.’

‘हम रिवाज बदल देंगे’

हिमाचल प्रदेश में 1990 के बाद से हर पांच साल में सत्ता अदल-बदलकर भाजपा और कांग्रेस के हाथों में जाती रही है, लेकिन ठाकुर का मानना है कि अब वह युग खत्म हो गया है.

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एक नया रिवाज विकसित हुआ है.लोग नए जनादेश के साथ सत्ता में वापसी कर रहे हैं. उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी को एक और कार्यकाल मिला. योगीजी ने उत्तर प्रदेश में सरकारें बदलने का दौर खत्म किया. सावंतजी (प्रमोद सावंत) गोवा में फिर सरकार में लौटे. हरियाणा से लेकर मणिपुर तक ट्रेंड बदल गया है. और यह इस बार हिमाचल में भी बदलेगा.

यह पूछे जाने पर कि इस बार के चुनाव अभियान में हिमाचल के मतदाताओं के लिए भाजपा का मूल संदेश क्या है, ठाकुर ने कहा, ‘हम यही संदेश देना चाहते हैं कि यह सरकार गरीबों की और गरीबों के लिए है. कुछ शक्तिशाली लोगों ने सोचा कि हिमाचल में शासन करने का अधिकार केवल उन्हें है, लेकिन मतदाताओं ने उन्हें गलत साबित कर दिया है.’

‘मुफ्त रेवड़ियां बांटने और सशक्त बनाने में अंतर होता है’

राज्य में चुनावी अभियान के बारे में बात करते हुए ठाकुर ने भाजपा की ‘कल्याणकारी योजनाओं’ के बारे में विस्तार से बताया, जिसमें 125 यूनिट मुफ्त बिजली देना भी शामिल है. साथ जोर देकर कहा कि ये अन्य पार्टियों की तरफ से ‘रेवड़ियां’ बांटने के वादों से अलग हैं.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस और आप की घोषणाएं सिर्फ रेवड़ी हैं, लेकिन भाजपा महिलाओं और समाज के गरीब वर्गों को कुछ लाभ देकर उन्हें सशक्त बनाने में जुटी है. और यह मुफ्त नहीं है. हमने महिलाओं के लिए बस किराया आधा करने की घोषणा की है, लेकिन अभी भी परिवहन विभाग की तरफ से कुछ शुल्क लिया जाता है.’

उन्होंने कहा, ‘जहां तक बिजली का सवाल है, हम इसे हरियाणा, दिल्ली और पंजाब को सप्लाई कर रहे हैं. गरीबों और मध्यम वर्ग की मदद के लिए हमने कुछ छूट की घोषणा की है, लेकिन यह उन श्रेणियों के लिए नहीं है जो भुगतान कर सकते हैं. कांग्रेस और आप ने सभी को मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है..रेवड़ियां बांटने और सशक्त बनाने में यही अंतर है.’

ठाकुर ने कहा कि भाजपा की कल्याणकारी घोषणाएं अन्य दलों की तुलना में अधिक विश्वसनीय हैं क्योंकि लोग ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादों और उनके ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री के हिमाचल के साथ मजबूत संबंध हैं. उन्होंने हट्टी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा (मंजूरी प्रस्तावित) दिया, जिसकी वे 1967 से मांग कर रहे थे.’

उन्होंने दावा किया कि हिमाचल भाजपा सरकार 1,300 करोड़ रुपये खर्च करके करीब 7.5 लाख लोगों को पेंशन दे रही है, जबकि कांग्रेस सत्ता में रहने के दौरान केवल 400 करोड़ रुपये खर्च कर रही थी.

ठाकुर ने कहा, ‘हमने हर महिला को उज्ज्वला योजना (खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन) दी. बेसहारा लोगों को सहारा योजना के तहत 3,000 से 20,000 रुपये तक दे रहे हैं, (स्वास्थ्य देखभाल के लिए) हिमकेयर योजना है..बद्दी एक फार्मा हब बन गया है (केंद्र सरकार की मदद से), एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) उद्घाटन के लिए तैयार है. ये तो कांग्रेस लोगों को बताए कि उसने हिमाचल के लिए क्या किया.’

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि उनकी सरकार ने किसी भी क्षेत्र में खराब प्रदर्शन किया है, मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितना वह चाहते थे, लेकिन अपने अगले कार्यकाल में वह इसमें सुधार की उम्मीद करते हैं.

उन्होंने कहा, ‘कोविड के कारण हम पर्यटन पर पर्याप्त काम नहीं कर पाए. लेकिन हमने तय किया है कि पहले से स्थापित पर्यटन स्थलों के अलावा कुछ और जगहों को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की जरूरत है, क्योंकि इसमें रोजगार सृजन की अधिक संभावना है.’

उनके मुताबिक, इसके लिए कनेक्टिविटी में सुधार करना भी बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा, ‘अगर हम नए पर्यटन स्थल बनाना चाहते हैं, तो हमारे पास एक बड़ा एयरपोर्ट होना चाहिए, जिसे हम मंडी में विकसित कर रहे हैं.’

‘कैडर का मनोबल बढ़ा, लोग भी रिस्पांस दे रहे’

पिछले साल नवंबर में हिमाचल भाजपा को एक करारा झटका लगा था जब वह फतेहपुर, अर्की और जुब्बल-कोटखाई विधानसभा उपचुनावों के साथ-साथ मंडी लोकसभा सीट भी हार गई.

इस बारे में पूछे जाने पर ठाकुर ने कांग्रेस की जीत का श्रेय वीरभद्र सिंह की मृत्यु और उनकी पत्नी प्रतिभा के चुनाव मैदान में उतरने के कारण ‘सहानुभूति की लहर’ को दिया. उन्होंने कहा, लोग वीरभद्र सिंह को ‘श्रद्धांजलि’ दे रहे थे, लेकिन अब ऐसी कोई सहानुभूति लहर नहीं बची है.

हालांकि, उन्होंने माना किया कि हार ने उन्हें ‘सजग’ किया और पार्टी नेताओं को और कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित किया और इस पर प्रतिक्रिया भी सकारात्मक रही है.

उन्होंने कहा, ‘कोविड के दौरान हमने लोगों की मदद के हरसंभव प्रयास किए. अब, चुनाव के समय राजनेताओं को लोगों के मूड का स्पष्ट तौर पर तो कुछ नहीं पता, लेकिन हम महसूस कर रहे हैं कि अधिकांश लोग हमारे अभियान से उत्साह के साथ जुड़ रहे हैं और यह हमें आत्मविश्वास प्रदान करता है.’

निश्चित तौर पर ठाकुर पर बहुत अधिक दबाव है और यह इसलिए भी और ज्यादा है क्योंकि भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा हिमाचल प्रदेश से हैं और पूर्व में राज्य प्रमुख रह चुके हैं, और इसलिए पार्टी की जीत खासतौर पर प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है.

उन्होंने कहा, ‘मैंने राज्य में भाजपा की सरकार बनाने के लिए पार्टी आलाकमान की उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन किया है. इस बार भी पार्टी ने मुझे राज्य के नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है. अतीत में हमारे प्रयास में एक कमी थी कि हम राज्य में लगातार सरकारें नहीं बना सके. इस बार हम उस गलती को भी सुधारेंगे.’

इन अटकलों पर कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, जिन्हें 2017 में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार माना जा रहा था, लेकिन अपनी सीट सुजानपुर से हार गए थे-इस बार विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, ठाकुर की प्रतिक्रिया काफी सधी हुई थी.

उन्होंने कहा, ‘धूमलजी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं. उन्होंने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हम उनसे मार्गदर्शन लेते हैं. इस मामले (धूमल के चुनाव लड़ने) पर कोई फैसला पार्टी आलाकमान ही करेगा.और जो भी फैसला होगा, सभी नेता उसे स्वीकार करेंगे.’

नौकरशाही के मुद्दों पर

हिमाचल प्रदेश में अक्सर ऐसी अटकलें चलती रहती हैं कि ठाकुर राज्य की नौकरशाही पर ठीक से नियंत्रण रख पाने में असमर्थ हैं. उदाहरण के तौर पर, इस महीने की शुरुआत में एक पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव, जिन्हें प्रशासन में शीर्ष पद के लिए सुपरसीड कर दिया गया था, ने इस मामले पर राज्यपाल को लिखा था. पिछले महीने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एचपीपीएससी) अध्यक्ष पद को लेकर भी विवाद हुआ था.

नौकरशाही पर लगाम कसने में दिक्कत आने को लेकर बन रही धारणा के बारे में पूछे जाने पर, ठाकुर ने कहा, ‘कई बार, नौकरशाही की प्रवृत्ति निर्णयों में देरी करने, फैसले लागू करने में कोई न कोई बहाना बनाने की होती है.हमने इसे कई बार ऐसा देखा है. लेकिन मेरा सवाल अलग है. एक आम धारणा है कि नौकरशाही सीएम की नहीं सुनती, लेकिन क्या नौकरशाहों को दबाकर सरकार चलाना संभव है? नौकरशाही का दुरुपयोग? यह सही तरीका नहीं है. हमने एक टीम के रूप में काम किया है और ईमानदारी से काम न करने वाले नौकरशाहों को दंडित भी किया है.’

ठाकुर ने कहा कि वो तो कांग्रेस है जो इस बात को फैलाती रही है कि वह और यहां तक कि धूमल का भी नौकरशाही से टकराव चलता रहा है, जबकि वीरभद्र सिंह एक ऐसे मजबूत सीएम थे जो सिविल सेवकों को नियंत्रण में रखते थे. उन्होंने कहा, ‘मैं कांग्रेस के लोगों से पूछना चाहता हूं कि अगर वह (वीरभद्र) इतने ही ताकतवर थे, तो राज्य में कांग्रेस सरकार की वापसी में सक्षम क्यों नहीं हो पाए थे?’

Leave a Reply