Education in Himachal: एक शिक्षक के सहारे चल रहे है यह स्कूल, शिक्षा की गुंबता पर उठे सवाल, जाने पूरा मामला

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Himachal Pradesh Govt Schools: शिक्षकों की कमी के चलते क्षेत्र में दिन प्रतिदिन शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।

लेकिन प्रदेश सरकार शिक्षकों की कमी को जानते हुए भी अनजान बनी हुई है। सरकार के इस रवैए के चलते क्षेत्र के अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से निकालकर निजी स्कूलों में दाखिल करवा रहे हैं। उपमंडल बंगाणा के तहत पड़ते राजकीय प्राथमिक पाठशाला छपरोह में 66 बच्चों को चार सालों से एक शिक्षक पढ़ा रहा है। इसी प्रकार बल्ह स्कूल में 49 बच्चों की जिम्मेदारी भी अकेले शिक्षक पर है। यही नहीं जिले की कई प्राथमिक पाठशालाओं में 30 से अधिक संख्या वाले बच्चों को अकेला शिक्षक पढ़ा रहा है। जबकि प्रदेश सरकार द्वारा बनाए नियम के अनुसार यदि किसी प्राथमिक स्कूल में बच्चों की संख्या 30 से अधिक हो जाती है, तो उस स्कूल में कम से कम दो शिक्षकों की तैनाती की जाती है।

लेकिन प्रदेश सरकार के नियम बंगाणा क्षेत्र में चलते नहीं दिख रहे। यहां पर किसी प्राथमिक पाठशाला में बच्चों की संख्या 10 के करीब है, तो उस पठशाला में दो शिक्षकों की नियुक्ति विभाग द्वारा की गई है, जबकि शिक्षा खंड की कई प्राथमिक पाठशाला में 30 से अधिक की संख्या वाले स्कूलों में एक शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहा है।

अभिभावकों के अनुसार कई स्कूलों में शिक्षकों का भी गैर जिम्मेदाराना रवैया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक अगर विभाग कम संख्या वाले स्कूलों से जहां पर दो या अधिक शिक्षक हैं एक शिक्षक का तबादला अधिक बच्चों की संख्या वाले स्कूल में करता है, तो ऐसे में शिक्षक अदालत से स्टे आदि ले लेते हैं। प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग द्वारा कई ऐसे स्कूलों को चलाया जा रहा है जिनमें बच्चों की संख्या 10 से भी कम है। सरकार को ऐसे स्कूलों को बंद कर देना चाहिए।

बल्ह पीटीए कमेटी प्रधान विपन कुमार शर्मा, मीनाक्षी देवी, ज्योति देवी, मंजू, बिंदु वाला, सोना, विजय कुमार, कमल किशोर, गुरप्यारी, छपरोह पंचायत प्रधान सुनीता देवी, बलवंत वर्मा, उप प्रधान गौरी, मुकेश सोहल, अश्वनी कुमार आदि का कहना है कि छपरोह व बल्ह स्कूलों में पिछले चार सालों से एक शिक्षक ही पांच कक्षाओं को संभाल रहा है। अकेला शिक्षक ही डाक निपटाता है, मीटिंग अटेंड करता है व पांच कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाता भी है। अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग व प्रदेश सरकार के नुमाइंदों से कई बार लिखित शिकायत करने के बावजूद इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्तियां आज तक नहीं हो पाई है।

क्‍या कहना है शिक्षक का

शिक्षक सुनील दत्त शर्मा ने बताया कि पांच कक्षाओं के 50 बच्चों को पढ़ाना व दफ्तर का काम संभालना बहुत कठिन है। लेकिन विभागीय निर्देशों के मुताबिक सभी बच्चों को एक समान पढ़ाया जाता है।

क्‍या कहते हैं अधिकारी

खंड शिक्षा अधिकारी सोमा देवी का कहना है शिक्षकों की कमी के कारण कई स्कूल एक शिक्षक द्वारा ही चलाए जा रहे हैं, जबकि सरकार के नियमों के मुताबिक 30 से अधिक संख्या वाले स्कूल में दो शिक्षक अनिवार्य हैं।

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