ओबीसी आरक्षण पर 38 बार सुनवाई के बाद भी मिली डेट, अगली सुनवाई 16 अगस्त को

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मध्य प्रदेश राज्य शासन ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का डाटा हाई कोर्ट में पेश कर दिया है. राज्यपाल द्वारा नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक प्रसाद शाह ने शासन की ओर से ओबीसी का पक्ष रखा.

रामेश्वर सिंह ठाकुर के मुताबिक, साल 2019 से अब तक दाखिल इन सभी प्रकरणों में 38 बार सुनवाई हो चुकी है. अब फाइनल सुनवाई के लिए इस बार आगामी 16 अगस्त की तारीख तय की गई है. वहीं, पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की मंशा के अनुरूप ओबीसी आयोग का गठन कर क्वांटिफिएबल डाटा कलेक्ट करने सुझाव समेत पत्र लिखकर शासकीय सेवाओं में ओबीसी के प्रतिनिधित्व का डाटा कलेक्ट कर कोर्ट में प्रस्तुत करने सुझाव दिया गया था.

इसके चलते सामान्य प्रशासन विभाग ने डाटा कलेक्ट किया. जिसमें कुल स्वीकृत पदों की संख्या 3 लाख 21 हजार 944 में से ओबीसी वर्ग को मात्र 43 हजार 978 पद यानी कि 13.66 प्रतिशत आरक्षित बताया गया है. उक्त जानकारी के डाटा हाई कोर्ट मे प्रस्तुत किए जा चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अभी पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट हाई कोर्ट में प्रस्तुत किया जाना शेष है.

ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण
अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर के मुताबिक, मध्य प्रदेश मे पहली बार 17 नवंबर 1980 को रामजी महाजन आयोग का गठन किया गया था. महाजन आयोग ने 22 दिसंबर 1983 को ओबीसी को 35 प्रतिशत आरक्षण समेत कई अनुशंसा समेत अपना प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत था, लेकिन उसे लागू आज तक नहीं किया गया. अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट मे एक जनहित याचिका दाखिल करके चुनौती दी गई थी, की संपूर्ण देश मे ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है.

ओबीसी आरक्षण को लेकर इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के प्रकरण में भी सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच द्वारा ओबीसी की 52.8 प्रतिशत जनसंख्या मान्य कर क्रीमीलेयर की शर्तों के अधीन 16 नवंबर 1992 में मंडल कमीशन की रिपोर्ट को मान्य कर ओबीसी को शासकीय सेवाओं में 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने निर्देश दिए थे. इस फैसले के विपरीत मध्य प्रदेश में ओबीसी को सिर्फ 14 प्रतिशत ही आरक्षण दिया गया और आज भी दिया जा रहा है. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार को 2016 मे कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे. इसका जबाब दाखिल करने के पूर्व ही मध्य प्रदेश सरकार ने 8 मार्च 2019 को ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया.

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